धारूहेड़ा: सोहना-पलवल हाईवे और धारूहेड़ा-भिवाड़ी बाईपास पर एक बार फिर दूषित पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। धारूहेड़ा के पास पानी को रोकने के लिए बनाया गया अवरोधक टूट गया है तथा अब तेजी से धारूहेड़ा में गंदा पानी पहुंच रहा है। अगर रहते इसे ठीक नहीं किया तो सेक्टर व छह में जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
अवरोधक टूटा, गंदा पानी पहुंचा धारूहेड़ा
भिवाड़ी बाइपास पर जमा फैक्ट्रियों के दूषित पानी ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। करीब एक सप्ताह से जमा दूषित पानी ने धारूहेड़ा व भिवाड़ी की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। भिवाड़ी बाईपास रोड पर जलभराव के कारण हालात बिगड़ गए। आलम यहां तक अब यहा पर बना गया अवरोधक टूट गया है जिससे धारूहेड़ा मे तेजी से पानी पहुंच रहा है। भिवाड़ी से आ रहा यह पानी सेक्टर चार में सुभाष चौक के पास अथाह रूप से जमा हो रहा है।

रेवाड़ी-पलवल राष्ट्रीय राजमार्ग पर जहां पहले ही बारिश का पानी भरा हुआ था वही अब कंपनियों की ओर से बारिश् की आड में काला पानी से स्थिति ओर भयानक हो गई। रैंप के टूटने के चलते अब तेजी से पानी धारूहेडा पहुंच रहा है। यह पानी सेक्टर चार के पास खाली प्लाटो व बेस्टेक रोड पर जमा हो गया है। सबसे अहम बात यह है अगर लगातार पानी जारी रहा तो अलवर बाइपास पर भरा सारा पानी धारूहेड़ा में ही पहुंच जाएगा।
जिसका डर था वही हुआ
बता दे पहले ही हरियाणा के लोगों का डर था कि वहीं रैंप को तोड नहीं दे। क्योंकि पहले भी भिवाड़ी प्रशासन की ओर से रैंप को तोडा जा चुका है। उसके बाद इसे रिपेयर कर दिया गया था लेकिन एक बार फिर से रैंप तोडने पर धारूहेड़ा में पानी आना शुरू हो गया है। रात से बडी मात्रा में अलवर बाइपास का काला पानी धारूहेड़ा पहुंच रहा है। तेजी से आ रहे पानी की वीडियों सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। अब सवाल यह है कि क्या इस रैंप को ठी करवाया जाएगा या नहीं। अगर ठीक नही करवाया तो धीरे धीरे सारा पानी धारूहेड़ा में ही आ जाएगा।
क्या हुआ नितिन गडकरी की ₹150 करोड़ की ड्रेन योजना का
धारूहेड़ा और भिवाड़ी बॉर्डर पर पिछले कई वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए केंद्र सरकार ने पहल तो की थी, लेकिन धरातल पर अभी तक इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। करीब 5 महीने पहले दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें हरियाणा और राजस्थान के शीर्ष नेता व अधिकारी शामिल हुए थेे जलभराव को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को 6 किलोमीटर लंबी ड्रेन (नाले) के निर्माण के लिए सर्वे करने के सख्त निर्देश दिए थे।
150 करोड योजना कहां गई: इस बड़ी जल निकासी परियोजना पर ₹150 करोड़ की लागत आनी तय हुई है। नियम के अनुसार, इसमें राजस्थान और हरियाणा सरकारें 25-25 करोड़ रुपए का योगदान देंगी, जबकि शेष बची हुई भारी राशि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा वहन की जाएगी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इस कागजी योजना का जमीनी स्तर पर काम शुरू न होने का खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है।













