Farmers Update: हरियाणा के धान उत्पादक किसानों के लिए इस समय का हर दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से जल संरक्षण को बढ़ावा देने और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से चलाई जा रही योजना के तहत किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। लेकिन इस लाभ का फायदा उठाने के लिए निर्धारित समय सीमा का पालन करना जरूरी है।
धान की खेती में बदल रहा है तरीका
प्रदेश के कई जिलों में किसान अब पारंपरिक रोपाई के बजाय धान की सीधी बुवाई तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका न केवल पानी की खपत कम करता है बल्कि खेत तैयार करने और मजदूरी पर होने वाले खर्च को भी नियंत्रित करता है। यही वजह है कि सरकार भी इस मॉडल को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
हरियाणा के किसानों के लिए सुनहरा मौका
सोनीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल और पानीपत जैसे धान उत्पादक क्षेत्रों में कृषि विभाग लगातार किसानों से संपर्क कर रहा है। विभाग का कहना है कि जो किसान निर्धारित शर्तों के अनुसार सीधी बुवाई करेंगे, उन्हें प्रति एकड़ 4500 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिल सकती है। इससे खेती का आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
25 जून के बाद बढ़ सकती है परेशानी
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे 25 जून से पहले अपनी बुवाई से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर लें। समय पर काम पूरा नहीं होने पर योजना के लाभ से जुड़ी औपचारिकताओं में दिक्कत आ सकती है। इसलिए किसान अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द तैयारी पूरी करें।
रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो अटक सकता है लाभ
कई बार किसान खेती का काम पूरा कर लेते हैं लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में जानकारी दर्ज नहीं होने के कारण योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए विभाग ने स्पष्ट किया है कि बुवाई के बाद पोर्टल पर पंजीकरण करवाना बेहद जरूरी है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्रता का सत्यापन किया जाता है।
फसल बचाने के लिए यह सलाह भी जरूरी
धान की शुरुआती बढ़वार के दौरान खरपतवार एक बड़ी चुनौती बन सकता है। कृषि अधिकारियों ने किसानों को समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार दवा का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इससे फसल का विकास बेहतर होगा और उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
पानी बचाने की दिशा में बड़ा कदम
हरियाणा में लगातार घटते भूजल स्तर को देखते हुए धान की सीधी बुवाई को भविष्य की खेती का महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकती है। यही कारण है कि सरकार इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने में जुटी हुई है।













