Haryana News: हरियाणा में जमीन से जुड़े लेन-देन को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब शहरी क्षेत्रों और उनसे सटे अधिसूचित इलाकों में जमीन की अदला-बदली (एक्सचेंज) पहले जैसी आसान नहीं रहेगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति ऐसे सौदों को मंजूरी नहीं मिलेगी। इस फैसले का सीधा असर हजारों भूमि मालिकों और प्रॉपर्टी निवेशकों पर पड़ सकता है।
जमीन की अदला-बदली पर सरकार की कड़ी नजर
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने साफ किया है कि अब भूमि विनिमय को भी नियामकीय दायरे में रखा जाएगा। पहले कुछ लोग अदला-बदली के जरिए नियमों से बचकर जमीन का हस्तांतरण कर लेते थे, लेकिन नए प्रावधानों के बाद ऐसा करना आसान नहीं होगा।
एक एकड़ से कम जमीन पर भी लेनी होगी अनुमति
नए नियमों के तहत यदि कोई व्यक्ति अधिसूचित शहरी क्षेत्र में एक एकड़ से कम जमीन की अदला-बदली करना चाहता है तो उसे पहले सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेनी होगी। बिना एनओसी के संबंधित दस्तावेजों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि कुछ इलाकों में जमीन की अदला-बदली का इस्तेमाल अवैध कॉलोनियां विकसित करने और नियमों को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा था। नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य ऐसे मामलों पर रोक लगाना और शहरी विकास को नियंत्रित करना है।
कैसे होता था नियमों का दुरुपयोग?
जांच के दौरान सामने आया कि कई मामलों में कम कीमत वाले छोटे भूखंडों के बदले अधिक मूल्यवान जमीन हासिल की जा रही थी। कागजों में इसे एक्सचेंज बताया जाता था, लेकिन वास्तव में यह अप्रत्यक्ष खरीद-फरोख्त का तरीका बन चुका था। इसी वजह से सरकार को कानून में बदलाव करना पड़ा।
30 जनवरी से प्रभावी माने जा रहे हैं नए प्रावधान
सरकार ने अध्यादेश के जरिए संशोधित नियमों को 30 जनवरी 2026 से लागू माना है। इसके तहत भूमि विनिमय विलेख को भी उन दस्तावेजों की श्रेणी में शामिल किया गया है जिनके लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
भूमि मालिकों के लिए क्या बदलेगा?
अब जमीन की अदला-बदली करने से पहले संबंधित विभाग की स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। इससे फर्जी लेन-देन पर अंकुश लगेगा, जमीन विवाद कम होंगे और शहरी क्षेत्रों में अवैध विकास गतिविधियों पर भी लगाम लग सकेगी।
सरकार का लक्ष्य: पारदर्शी और सुरक्षित भूमि लेन-देन
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भूमि बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सरकार की कोशिश है कि भविष्य में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े या नियमों की अनदेखी को रोका जा सके और वैध भूमि मालिकों के हित सुरक्षित रहें।














