Breaking News: धारूहेड़ा: मसानी बैराज के गंदे पानी की समस्या के समाधान की मांग को लेकर चलाए जा रहे जन आंदोलन के तीसरे चरण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अब तीसरे चरण के तहत 28 जून को सुबह 6 बजे ग्राम भटसाना से जन चेतना यात्रा एवं पदयात्रा शुरू होकर सुबह 10 बजे बुढ़ाना चौक पर संपन्न होगी। यात्रा की तैयारियों एवं ग्रामीणों को जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को विभिन्न गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाया गया तथा बैठक आयोजित कर जिम्मेदारी सोंपी गई।Breaking News

कार्यक्र के संयोजक सेवानिवृज वन रेंज अधिकारी कमल यादव ने बताया कि शनिवार को ग्राम ततारपुर, ईतमुरार, तुर्कियावास तथा बुढ़ाना में ग्रामीणों से संपर्क कर यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई। कमल सिंह यादव ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि मसानी बैराज का गंदा पानी अब इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर क्षेत्र तक पहुंच चुका है। इसके कारण आसपास के इलाके में दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों की संख्या बढ़ रही है।Breaking News
लगातार बढ रहे गंदे पानी से केवल जलस्तर खराब हो चुकी है वहीं गंदे पानी के जलभराव से महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका गंभीर असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।Breaking News

कमल सिंह यादव ने बताया कि गंदे पानी के कारण अनेक किसानों के खेत प्रभावित हुए हैं तथा कई स्थानों पर पानी भर जाने से किसान फसलों की बिजाई नहीं कर पाए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन किसानों की भूमि में गंदा पानी खड़ा है, उन्हें फसल के बराबर उचित मुआवजा दिया जाए।Breaking News

साथ ही सरकार जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान करे ताकि क्षेत्र में बढ़ते स्वास्थ्य संकट और किसानों की परेशानी को दूर किया जा सके। इस अवसर पर पूर्व सरपंच नवल सिंह डूंगरवास, रामफल, हनीश शर्मा जीतपुर, महिपाल थानेदार फदनी, वैभव यादव सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।Breaking News
झूठे सपने दिखाकर किया धोखा: ग्रामीणों ने कहा कि मनोहर लाल खटटर लोगो को कृकृत्रित झील बनाने के सपने दिखाकर जनता के साथ धोखा किया है। दरसल रेवाड़ी व बावल के गंदे पानी को बाहर निकालने के लिए यह सब खेल खेला गया है।

क्योंकि धारूहेड़ा में इस समस्या को नेतृत्व करने वाले कोई नहीं है। सरकार साफ पानी बताकर एनजीटी में रिपोर्ट देकर अपना पीछा छुडवा रही है जबकि काला यानि बिना ट्रीट किया हुआ पानी छोडा जा रहा है।Masani Barrage
2018 में मनोहर लाल ने की थी घोषणा
बता दें हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर 2018 में मसानी बैराज पर आए थे। उस समय उन्होंने मसानी बैराज का निरीक्षण करने के बाद इसे पर्यटक केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। उस समय बजट भी जारी करने की घोषण की थी। उनका मकसद इस विरान क्षेत्र पर कृत्रिम झील बना कर लोगो के लिए पयर्टक केंद्र बनाना था। दिल्ली-जयपुर हाईवे से आना-जाना करने वाले वाहन चालकों को आकर्षित किया जा सके।

6332.54 करोड़ की परियोजना प्रस्तावित
अब सिंचाई विभाग ने “एचएसआईआईडीसी आईएमटी बावल से साहबी नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बरसाती जल निकासी” के नाम पर लगभग ₹6332.54 लाख की विशाल परियोजना प्रस्तावित की गई है। जिसे 400 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत आईएमटी बावल का पानी सीधे साहबी बैराज मसानी में डालने की तैयारी है।
पानी बता दे कि मसानी बैराज के आसपास साहबी नदी करीब 500 एकड़ जमीन में फैली हुई है। जिसमें अधिकतर रेवाड़ी व आसपास का दूषित पानी जमा है। बताया जा रहा है कि गांव जड़थल, असदपुर, सुनारिया, ततारपुर, इस्तमुरार इत्यादि से 1957, 1964 और 1971 तक साहबी, कृष्णावती और दोहन नदी का पानी निजी मालिकों की जमीन से बहता था।
जिससे यह कहा जा सकता है कि इन नदियों का अतिरिक्त पानी यहां छोड़ा जाता था। लेकिन इस साहबी को गंदे पानी की झील बना दिया है। सबसे अहम बात यह है 5 मई से हस्ताक्षर अभियान शुरू करके अब तीसरे चरण में जन चेतना यात्रा निकाली जा रही है लेकिन प्रशासन इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है।













