Breaking News: वट सावित्री व्रत को लेकर शनिवार को महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही महिलाओं ने वट वृक्ष के पास पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर धागा बांधा और अपने पति की लंबी आयु व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
एक-दूसरे को व्रत की दी शुभकामनांए: कई स्थानों पर महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाते हुए पूजा संपन्न की। धार्मिक मान्यता के अनुसार वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर भगवान विष्णु, माता सावित्री और वट वृक्ष की पूजा की। गांवों और कॉलोनियों में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएं दीं और परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन किया।Breaking News

जानिए क्यों की जाती है वट वृक्ष की पूजा: बता दे कि वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा हिंदू धर्म में विशेष आस्था मानी जाती है। इसे दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का निवास माना गया है।इसी लिए महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है।Breaking News
संरक्षण और जीवन का प्रतीक :पुराने समय में गांवों में बरगद के पेड़ के नीचे पंचायत, धार्मिक आयोजन और सामाजिक बैठकों का आयोजन किया जाता था। भारतीय संस्कृति में वट वृक्ष को स्थिरता, संरक्षण और जीवन का प्रतीक माना गया है।धार्मिक महत्व के साथ-साथ वट वृक्ष का पर्यावरणीय महत्व भी काफी बड़ा है। यह पेड़ लंबे समय तक जीवित रहता है और अधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करता है। इसकी घनी छाया लोगों को गर्मी से राहत देती है।
परिवार की खुशहाली की कामना: बता दें कि इस दिन महिलाएं पेड़ के चारों ओर धागा बांधकर पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। यह परंपरा सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप, भक्ति और संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से वट वृक्ष को अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का प्रतीक माना जाने लगा।












