Haryana में सामने आए करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े बैंकिंग फ्रॉड मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में जिन आईएएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने फिलहाल इन अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए राज्य सरकार से अनुमति भी नहीं मांगी है। ऐसे में यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस बैंक फ्रॉड में सरकारी विभागों के खातों से भारी रकम निकालने का आरोप है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला काफी सुनियोजित तरीके से किया गया और इसमें बैंक कर्मचारियों से लेकर निजी कंपनियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है। एसीबी इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन जांच का दायरा अभी और बढ़ने की संभावना है।
पहले छोटे कर्मचारियों पर फोकस ?
एसीबी की अब तक की कार्रवाई को देखें तो जांच एजेंसी ने सबसे पहले बैंक कर्मचारियों और निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों को निशाने पर लिया है। अब तक कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें IDFC बैंक के चार कर्मचारी, बैंक के दो पूर्व कर्मचारी, एक कथित मास्टरमाइंड, स्वास्तिक देश कंपनी की महिला संचालक और उसका भाई, पंचायती राज विभाग का एक सुपरिटेंडेंट तथा एक निजी व्यक्ति शामिल हैं।
जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल उनका ध्यान उन लोगों को गिरफ्तार करने पर है जो सीधे तौर पर इस घोटाले को अंजाम देने में शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि अगर शुरुआत में ही आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई तो मामले में दबाव और विवाद बढ़ सकता है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से एसीबी पहले मामले से जुड़े छोटे कर्मचारियों और निजी लोगों की गिरफ्तारी कर रही है। इसके बाद ही उच्च स्तर के अधिकारियों तक पहुंचने की योजना बताई जा रही है। हालांकि इस रणनीति को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर इतने बड़े घोटाले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच में देरी क्यों हो रही है।
6 और लोगों की तलाश जारी ?
जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में अभी कई और लोगों की गिरफ्तारी बाकी है। सूत्रों के मुताबिक कम से कम छह ऐसे लोग हैं जिनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है और एसीबी लगातार उनकी तलाश कर रही है। इनमें कुछ सरकारी विभागों से जुड़े लोग हैं तो कुछ निजी कंपनियों और कारोबारियों के नाम भी सामने आए हैं।
इनमें एक नाम बिजनेसमैन विक्रम वधवा का भी बताया जा रहा है। जांच से जुड़े लोगों का कहना है कि वधवा की भूमिका इस घोटाले में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि फिलहाल वह जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर बताया जा रहा है। कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि वह देश छोड़कर विदेश जा चुका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एसीबी का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल एजेंसी दस्तावेजों और बैंक ट्रांजैक्शन की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर सरकारी विभागों के खातों से इतनी बड़ी रकम किस तरह निकाली गई और उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
इस पूरे मामले में आईएएस अधिकारियों के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल सरकार से मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर किसी भी अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल एसीबी की जांच जारी है और आने वाले समय में इस बैंकिंग फ्रॉड केस में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसी कब तक इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए सरकार से अनुमति मांगती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

















