राजस्थान विधानसभा में राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के कई विधायकों ने सरकार के इस विधेयक पर सवाल उठाते हुए इसे जल्दबाजी में लाया गया कानून बताया।
कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने कहा कि सरकार एक ही विधेयक के जरिए 11 अलग-अलग कानूनों में संशोधन करना चाहती है, जो सही प्रक्रिया नहीं है। उनका कहना था कि जिन विभागों से जुड़े कानूनों में बदलाव प्रस्तावित हैं, उन विभागों के मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। इसलिए हर संशोधन पर अलग-अलग चर्चा होनी चाहिए थी।
विधायक नरेंद्र बुडानिया ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संशोधन बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के तैयार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों के सुझाव पर लाया गया यह बिल बड़े लोगों को फायदा पहुंचा सकता है। उनके अनुसार अपराध को छोटा या बड़ा नहीं माना जा सकता और यह कानून जनता के हित में नहीं दिखता। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक को जनमत के लिए भेजा जाना चाहिए।
कांग्रेस विधायक रफीक खान ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसमें 11 अलग-अलग कानूनों को शामिल किया गया है। उनका आरोप था कि कुछ संशोधनों से खेजड़ी पेड़ काटने जैसे मामलों में कार्रवाई कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विभागों के कानूनों को एक ही विधेयक में शामिल करना परंपरा के खिलाफ है और इससे आम लोगों को नुकसान हो सकता है।
हालांकि सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री जोगाराम पटेल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह “जन विश्वास” से जुड़ा कानून है और इसका उद्देश्य छोटे-छोटे मामलों को सरल बनाना है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि वन अधिनियम में केवल एक संशोधन प्रस्तावित है और इसे किसी उद्योगपति के लाभ से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदाय को कई बार मामूली कारणों से सख्त सजा का सामना करना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी आजीविका के लिए पेड़ की छोटी टहनी ले जाए, तो उसे छह महीने की सजा देना उचित नहीं माना जा सकता। सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाना है।
खेजड़ी पेड़ से जुड़े कानून पर मंत्री ने बताया कि पहले इसके लिए मात्र 100 रुपये का जुर्माना था, जिसे बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर विस्तृत अध्ययन करा रही है और भविष्य में इस पेड़ के संरक्षण के लिए और मजबूत कानून लाया जाएगा।
विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में हंगामे की स्थिति भी बन गई। जब विधायक हरिमोहन शर्मा बोल रहे थे, तब सभापति संदीप शर्मा ने उनका समय समाप्त होने की घोषणा कर दी। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
संसदीय कार्य मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता सदन की व्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के विधायकों ने विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। इस बीच सभापति ने स्पष्ट किया कि सदन में समय प्रबंधन और घंटी बजाने का अधिकार केवल आसन का है।
अंततः लंबी बहस और हंगामे के बाद राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

















