गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

Haryana Hindi News: हरियाणा के CM बनने के दो ही रास्ते

Written by: सुनील चौहान

Published:

  Haryana Hindi News: हरियाणा गठन के समय 1966 में कांग्रेस पार्टी हाई कमान ने अपनी पसंद के पंडित भगवत दयाल शर्मा को राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनाया था । विधायकों की…


 

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Haryana Hindi News: हरियाणा गठन के समय 1966 में कांग्रेस पार्टी हाई कमान ने अपनी पसंद के पंडित भगवत दयाल शर्मा को राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनाया था । विधायकों की पसंद ना होने के कारण जुगाड़ के मास्टर चौधरी देवीलाल ने पंडित जी का 6 महीने के भीतर ही तख्ता पलट करवा कर राव बीरेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनवा दिया । आया राम गया राम की राजनीति के चलते राव भी 9 महीने के भीतर अपनी कुर्सी गंवा बैठे ।

 

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1968 में हुए विधानसभा के मध्यवर्ती चुनाव में कांग्रेस हाई कमान ने बंसीलाल को मुख्यमंत्री बनाया जो 1975 तक कुर्सी पर बने रहे । बंसीलाल को जब केंद्र में रक्षा मंत्री बनाकर पार्टी ने उनकी अनुशंसा पर बनारसी दास गुप्ता को राज्य का मुखिया बना दिया । 1977 में चौधरी देवीलाल जनता पार्टी की एकमात्र पसंद के रूप में मुख्यमंत्री बने लेकिन विधायकों की नाराजगी के चलते जुगाड़ के मास्टर भजनलाल ने देवीलाल को हटाकर बीच में ही मुख्यमंत्री की गदी प्राप्त की ।

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1980 में केंद्र की सत्ता में परिवर्तन होने पर भजन लाल अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में जा मिले । 1982 में पूर्ण बहुमत न होते हुए एक बार फिर भजनलाल ने बाजी मार ली । 1987 में चौधरी देवीलाल पूर्ण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हुए। जुगाड़ के एक और मास्टर ओम प्रकाश चौटाला ने इस कार्यकाल में एक बार नहीं तीन बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली ।

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मास्टर हुकम सिंह और बनारसी दास गुप्ता को भी बीच-बीच में हाई कमान के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री का पद नसीब होता रहा , सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई । 1991 के चुनाव में एक बार फिर भजनलाल अपनी करामात से चौधरी बीरेन्द्र सिंह को पीछे छोड़कर मुख्यमंत्री पद लेने में कामयाब हुए। 1996 में हविपा – भाजपा गठबंधन सरकार की बंसीलाल ने बागडोर संभाली ।

 

 

मध्यकाल में ही प्रो राम बिलास शर्मा, राव नरबीर सिंह और मनोहर लाल खट्टर की तिकड़ी ने गठबंधन सरकार तोड़ ली और घर बैठे ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री का आसन फिर नसीब हुआ । 2005 के चुनाव में जुगाड़ के मास्टर भजनलाल अपने समर्थक विधायकों का बहुमत जीतने में कामयाब रहे लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने अपनी पसंद के भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बागडोर सौंप कर भजनलाल की राजनीति का अंत कर दिया । 2009 के चुनाव में बहुमत से दूर रहने पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी जुगाड़ राजनीति का सहारा लेकर सरकार बनाने में कामयाबी प्राप्त की।

 

 

2014 में पहली बार प्रदेश में भाजपा ने पूर्ण बहुमत प्राप्त किया, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रो राम बिलास शर्मा, वरिष्ठ नेता कैप्टन अभिमन्यु ताकते रहे पार्टी हाई कमान ने मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बना दिया। 2019 में राव इंद्रजीत सिंह भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नजर आए लेकिन मनोहर लाल खट्टर लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने । 2024 में चुनाव से पहले पार्टी के गिरते ग्राफ को सुधारने के लिए हाई कमान ने खट्टर को केंद्र में और उनकी अनुशंसा पर नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया।

 

अनिल विज और राव इंद्रजीत सिंह दोनों ही निराश हुए।
राजनीतिक विश्लेषक नरेश चौहान एडवोकेट ने बताया कि राजनीति में लोग भजन कीर्तन करने नहीं आते; विधायक, सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री की चाहत लेकर ही आते हैं। लेकिन हरियाणा का 60 वर्षीय इतिहास तो यही बताता है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री पार्टी हाई कमान की पसंद या जुगाड़ की मास्टरी से बनता आ रहा है।

सुनील चौहान
About the Author सुनील चौहान

सुनील चौहान Best24News के संस्थापक एवं वरिष्ठ संपादक हैं। उन्हें रेवाड़ी, धारूहेड़ा और हरियाणा की स्थानीय पत्रकारिता का लगभग 10 वर्षों का अनुभव है। वे पहले दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरिभूमि और अमर उजाला जैसे समाचार संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वे राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय जनसमस्याओं से जुड़ी खबरों के संपादन एवं प्रकाशन का कार्य करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचार पहुंचाना है। View all posts by सुनील चौहान →

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