शनिवार, 7 नवम्बर 2026

Haryana DGP को हाईकोर्ट का आदेश, रोड एक्सीडेंट केस में फंसे अमित कुमार की पुरुष कांस्टेबल नियुक्ति पर पुनर्विचार

Written by: Sunil Rajput

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Haryana: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा पुलिस के महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया है कि वे एक पुरुष कांस्टेबल (GD) पद के उम्मीदवार की नियुक्ति पर पुनर्विचार करें। उम्मीदवार अमित…


Haryana DGP को हाईकोर्ट का आदेश, रोड एक्सीडेंट केस में फंसे अमित कुमार की पुरुष कांस्टेबल नियुक्ति पर पुनर्विचार
Haryana DGP को हाईकोर्ट का आदेश, रोड एक्सीडेंट केस में फंसे अमित कुमार की पुरुष कांस्टेबल नियुक्ति पर पुनर्विचार
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Haryana: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा पुलिस के महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया है कि वे एक पुरुष कांस्टेबल (GD) पद के उम्मीदवार की नियुक्ति पर पुनर्विचार करें। उम्मीदवार अमित कुमार की नियुक्ति केवल इस आधार पर अस्वीकार कर दी गई थी कि उनके खिलाफ एक सड़क दुर्घटना मामले में ट्रायल लंबित था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला न तो नैतिक अव्यवहार (moral turpitude) से संबंधित था और न ही तीन साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध से। इसलिए, नियुक्ति अस्वीकार करना नियमों के विपरीत था।

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एकल पीठ के न्यायाधीश जगमोहन बंसल ने कहा कि पंजाब पुलिस नियम, जो हरियाणा में भी लागू हैं, केवल उन्हीं मामलों में उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने की अनुमति देते हैं, जहां आरोप नैतिक अव्यवहार या तीन साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराध से संबंधित हों। अमित कुमार के खिलाफ दर्ज धाराएँ इस श्रेणी में नहीं आतीं। महेन्द्रगढ़ निवासी अमित ने पुरुष कांस्टेबल के पद के लिए आवेदन किया था और सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया था।

विवादित मामला और हाई कोर्ट का फैसला

इस बीच, अमित कुमार ने ट्रायल के समय सच्चाई से जानकारी दी थी। सितंबर 2023 में पुलिस और जिला अटॉर्नी ने कहा कि मामला अधीन परीक्षण है। इसके बाद, 3 मई 2025 को ट्रायल कोर्ट ने अमित को पूरी तरह से बरी कर दिया, यह मानते हुए कि शिकायतकर्ता का बयान केवल सुनवाई पर आधारित था। इसके बावजूद, 18 अगस्त 2025 को अमित की उम्मीदवारी इस आधार पर अस्वीकृत कर दी गई कि बरी होने का आदेश सत्यापन प्रक्रिया के बाद आया। उच्च न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि नियमों की गलत व्याख्या की गई है।

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हाई कोर्ट ने DGP को निर्देशित किया

हाई कोर्ट ने रविंद्र कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती प्राधिकरण को आरोपों की प्रकृति, घटना का समय, उम्मीदवार का आचरण और मामले के अंतिम परिणाम को समग्र दृष्टिकोण से देखना चाहिए। यहां न केवल आरोप गंभीर नहीं थे, बल्कि उम्मीदवार ने पूरी जानकारी ईमानदारी से दी और अदालत द्वारा पूर्णत: बरी भी किया गया। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने हरियाणा के DGP को निर्देश दिया कि वे उम्मीदवार के मामले की पुन: जांच करें और यदि वह योग्य पाया जाता है, तो उसकी निर्धारित जॉइनिंग डेट को नियुक्ति की प्रभावी तिथि माना जाए ताकि उसे सभी सेवा लाभ बिना किसी रुकावट के मिल सकें।

Sunil Rajput
About the Author Sunil Rajput

Best24News के संस्थापक (Founder) हैं और पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के साथ काम करते हुए सामाजिक, प्रशासनिक और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से कवर किया है। Best24News के माध्यम से ताजा और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचा रहे हैं। View all posts by Sunil Rajput →

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