धारूहेड़ा: जिला परिषद के सौजन्य से धारूहेड़ा के चार गांवों में एक जुलाई को एक करोड की विकास कार्यों का उद्घाटन एवं शिलान्यास हुआ। लेकिन इन विकास कार्यों के लिए तैयार किए गए शिलान्यास और उद्घाटन पत्थरों ने जिले में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। बता दें कि इन पत्थरों में सांसद राव इंद्रजीत सिंह और महेंद्रगढ़ की अटेली से विधायक आरती राव का नाम तो मोटे अक्षरों में अंकित दिखा, लेकिन रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव गायब मिला।

पत्थरो पर लगे नाम में प्रोटोकॉल पर उठे सवाल’
बता दें धारूहेड़ा के आकेडा, मालोहडा, ततारपुर सहित चार गांवों में विकास कार्य के लिए लगाए गए पत्थर पर केंद्रीय मंत्री एवं सांसद राव इंद्रजीत सिंह और आरती राव के साथ जिला प्रमुख मनोज यादव, उपप्रमुख नीलम अनिल रायपुर का नाम तो लिखा हुआ था। परंतु रेवाड़ी के विधायक का नाम इनमें गायग था। प्रोटोकॉल के मुताबिक सरकारी फंड से होने वाले कार्यों में स्थानीय विधायक का नाम होना अनिवार्य माना जाता है, ऐसे में विधायक का नाम गायब होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
पुरानी सियासी टीस और ‘बहिष्कार का न्यौता’
रेवाड़ी और बावल की इस सियासी खींचतान की पटकथा पिछले साल ही लिखी जा रही थी। पिछले साल 15 जून को राव तुलाराम स्टेडियम में रेवाड़ी विधानसभा की रैली हुई थी, जिसमें राव इंद्रजीत सिंह पहुंचे थे, परंतु उनके समर्थक पार्टी पदाधिकारियों और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने इससे दूरी बनाई थी। पार्टी संगठन ने भले ही तब इस पर संज्ञान नहीं लिया, लेकिन विधायक को यह बात याद थी। बताया जा रहा है इस बात का एक साल बाद बदला लिया गया है।
विवादों में आई सीएम की बावल रैली
हाल ही में 30 जून को बावल रैली में जब सांसद-विधायकों के साथ संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने दूरी बनाई, तो यह बड़ी सुर्खियां बन गईं। इसके बाद 6 जुलाई को विधायक ने पिछले साल की रैली की टीस को बावल में सीएम के कार्यक्रम से दूरी बनाकर ‘डबल’ करके लौटा दिया। हालांकि पूरे हरियाण में ये चर्चा जोरो पर है कि तीन विधायक व सांसद राव इ्ंद्रजीत सीएम के कार्यक्र्म से नदारद रहे।
नही मिला न्यौता, मै क्यों जाउ
सोमवार को धारूहेड़ा में चेयरमैन के शपथ समारोह मे पहुंचे राव इंद्रजीत सिंह ने जिस प्रकार से निमंत्रण नहीं मिलने की बात कही, उसने अपनी और बावल विधायक की अनुपस्थिति को जायज ठहराया। विधायक की ओर से साफ किया गया कि एक तो उन्हें संगठन और प्रशासन की तरफ से शपथ ग्रहण कार्यक्रम का विधिवत न्यौता नहीं मिला था।

कांग्रेस से भी ज्यादा टुकडे हुए भाजपा के
रेवाड़ी विशेषकर अहीरवाल में शुरू से ही रामपुरा और बूढ़पुर हाउस में पिछले कई सालों से रतनातनी बनी रही है। राव बीरेंद्र सिंह और राव मोहर सिंह के समय से चली आ रही राजनीतिक लड़ाई का नेतृत्व पिछले करीब 4 दशक से बरकरार है। 2014 से दोनों भाजपा में होते हुए भी मौका मिलने पर एक दूसरे के खिलाफ बोलने का कोई मौका नहीं चूकते। जबकि कोई कार्यक्रम होतो है हमेशा ही कटाक्ष किए जाते है।
2014 के बाद से धीरे-धीरे रामपुरा हाउस में पार्टी का पॉवर सेंटर शिफ्ट होने लगा। दो दिग्गजों की लड़ाई में अपनी अनदेखी से आहत संगठन से जुड़े पुराने कार्यकर्ता अपनी अनदेखी से आहत होकर घर बैठने लगे। जिससे पार्टी तीन धड़ों में बंट गई। धारूहेड़ा में शपथ ग्रहण के बाद रेवाड़ी के विधायक की मंच से दूरी होना, धारूहेड़ा विकास कार्यो मे रेवाड़ी विधायक का नाम नहीं होना। इतना नही चेयरमैन टिकट को लेकर भी तनातनी से भाजपा की एकता को ग्रहण लग गया है।












