Haryana Breaking News: हरियाणा के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एयु स्मॉल फाइनेंस बैंक में लगभग 750 करोड़ का घोटाला हुआ है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के द्वारा इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया है और सीबीआई जांच भी शुरू हो चुकी है।
सीबीआई के द्वारा दिल्ली में एफआईआर दर्ज करके बैंक को दलों के जांच को अपने हाथ में ले लिया गया है वही मुख्यमंत्री के द्वारा वीरवार को दो सीनियर आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार और रामकुमार सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। अधिकारियों का नाम जांच में काम में आया है जिसके बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया और दोनों टीम में अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। हरियाणा के अफसर शाही पर लगातार सवाल उठ रहे थे जिसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया है।
बता दे कि प्रदीप कुमार ढाई महीने के बाद 30 जून को रिटायर्ड होने वाले हैं वही रामकुमार सिंह डेढ़ साल के बाद 2027 नवंबर में रिटायर्ड होने वाले हैं। इन दोनों अधिकारियों का नाम बैंक घोटाले में सामने आया है जिसके बाद मुख्यमंत्री ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है।
बुधवार को 15 अधिकारियों का तबादला भी कर दिया गया। सूत्रों की माने तो आधा दर्जन आईएएस अधिकारियों पर इस मामले में गाज गिर सकती है। विधानसभा के बजट सत्र में जब विपक्ष ने बैंक में हुए घोटाले का मामला उठाया तो मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि किसी भी दोषी को बक्सा नहीं जाएगा। सरकार के द्वारा पाई पाई का हिसाब लिया जाएगा।
आपको बता दे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में ₹590 करोड़ का घोटाला हुआ है वहीं कोटक महिंद्रा बैंक पंचकूला में 160 करोड़ का घोटाला हुआ है और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में भी करोड़ों का घोटाला हुआ है। मुख्यमंत्री नायक सिंह सैनी के द्वारा खुद इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया है ताकि इसकी जांच अच्छी तरह से हो सके और सच्चाई सामने आ सके। सीबीआई के द्वारा शुरुआती जांच शुरू कर दी गई है अब देखना होगा कि आने वाले समय में इसका क्या नतीजा निकलता है।




















