Holi 2026 Kab Manai Jayegi: होली के बाद कब होगी धुलंडी, यहां जाने सही समय व तिथि

On: March 21, 2026 7:12 PM
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Holi 2026 Kab Manai Jayegi: रंगों का पर्व होली हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाता है, लेकिन तिथि को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बन जाती है। इस बार कुछ ज्यादा ही बदलाव हो रहा है।

 

क्योकि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार सही तिथि और शुभ मुहूर्त में पर्व मनाने से सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फ लकी प्राप्ति होती है। इसलिए यदि आप असमंजस में हैं कि 3 मार्च या 4 मार्च — तो यहां जानिए सही तिथि व समयHoli 2026 Kab Manai Jayegi

होलिका दहन और घुलंडी की अलग तिथि: क्योंकि अक्सर होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली यानि धुलंडी ही खेली जाती है। लेकिन 2026 में यह क्रम थोड़ा बदला हुआ दिखाई देगा। इस बार 2 मार्च की रात होलिका दहन होगा, पर 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक काल होने के कारण धुलंडी नही होगी। इसी के चलते इसी वजह इस बार धुलंडी यानि रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा।

 

3 या 4 मार्च — जानिए कब है होली?

  • 2 मार्च 2026 (सोमवार): होलिका दहन
  • 3 मार्च 2026 (मंगलवार): पूर्ण चंद्र ग्रहण
  • 4 मार्च 2026 (बुधवार): रंगों की होली

होलिका दहन के ठीक अगले दिन यानी 3 मार्च को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण के समय और सूतक काल में किसी भी शुभ कार्य का आयोजन नहीं किया जाता हैा। रंग खेलना भी एक मंगलमय और उत्सवी गतिविधि मानी जाती है, इसलिए ग्रहण के प्रभाव के कारण इसे एक दिन आगे बढ़ाकर 4 मार्च को मनाया जाएगा।

होलिका दहन की पूजा कैसे करें?
होलिका दहन से पहले परिवार के साथ विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है।
होलिका के चारों ओर परिक्रमा करें।
कच्चा सूत, गेहूं की बालियां, नारियल और जल अर्पित करें।
“ॐ होलिकायै नमः” मंत्र का जाप करें।

 

भद्रा काल का प्रभाव बनी आफत: होली 2026 में एक और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योग है—भद्रा काल. 2 मार्च की शाम से भद्रा का वास शुरू होगा और यह 3 मार्च की सुबह 4:56 बजे तक प्रभावी रहेगा। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकता। विशेषकर होलिका दहन जैसे पर्व में भद्रा का ध्यान रखना आवश्यक माना गया है।

जानिए भद्रा काल क्यों अशुभ माना जाता है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार भद्रा को अशुभ योग माना गया है। भद्रा के समय किया गया कार्य बाधाओं और विघ्नों का कारण बन सकता है। होलिका दहन भद्रा समाप्त होने के बाद किया जाए या यदि संभव हो तो भद्रा पुच्छ काल में किया जाए, जिसे अपेक्षाकृत शुभ माना गया है। इसलिए 2 मार्च की रात में भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन करना अधिक उचित रहेगा।

 

क्या है पुरानी रिवाज

  • फाल्गुन पूर्णिमा की रात – होलिका दहन
  • अगले दिन सुबह – धुलेंडी या रंगों की होली

लेकिन यदि अगले दिन ग्रहण, सूतक या अन्य अशुभ योग हो, तो रंग खेलने की तिथि आगे बढ़ाई जा सकती है। यही कारण इस बार यानि 2026 में यही स्थिति बन रही है।

क्यों मनाते है होली पर्व: हिरण्यकश्यप ने स्वयं को भगवान मानने का आदेश दिया। प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। होलिका को वरदान था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी। प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने पर होलिका जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है।

 

ग्रहण और सूतक का महत्व
3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा. हिंदू धर्म में ग्रहण काल को संवेदनशील और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है.

ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. सूतक के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. पूजा-पाठ, भोजन पकाने और शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है. इसी कारण 3 मार्च को रंग खेलने की परंपरा का पालन नहीं किया जाएगा.

कब मनाएं होली 2026?
सभी ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांग और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए:

2 मार्च 2026 (सोमवार, रात): भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन
3 मार्च 2026 (मंगलवार): चंद्र ग्रहण, रंग खेलने से परहेज
4 मार्च 2026 (बुधवार): रंगों की होली
इस प्रकार वर्ष 2026 में रंगभरी होली 4 मार्च को मनाई जाएगी.

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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