रेवाड़ी (Best24News): आधुनिक जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के दौर में टाइप-2 डायबिटीज (Sugar) एक विकराल रूप ले रही है। ,प्राकृतिक खेती संयमित दिनचर्या, देशी खान-पान और सही जानकारी के दम पर इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसा ही एक व्यक्तिगत अनुभव और प्राकृतिक खेती से जुड़ा अनूठा सुझाव अहीरवाल क्षेत्र के जागरूक किसानों और स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
कमर दर्द से हुई शुरुआत, टेस्ट कराया तो निकला 545 शुगर लेवल
अनुभव साझा करते हुए किसान ने बताया कि दिसंबर 2025 में जब कमर में असहनीय दर्द हुआ और कोई दवा असर नहीं कर रही थी, तब जांच कराने पर पता चला कि उनका ब्लड शुगर लेवल 545 तक पहुंच चुका था।
गौर करने वाली बात यह है कि पीड़ित के घर में वर्ष 2016 से लगातार देशी गाय का दूध व घी इस्तेमाल हो रहा था। इसके बावजूद यह स्थिति बनने से यह सीख मिलती है कि सिर्फ एक शुद्ध खाद्य वस्तु ही नहीं, बल्कि शारीरिक गतिविधि और संपूर्ण आहार (Balanced Diet) पर संयम रखना भी उतना ही जरूरी है।
आहार संयम से पाया काबू, जौ और चने को भोजन में शामिल करने की सलाह
नियमित दवाइयों, परहेज और खान-पान में सुधार के बाद अब उनका शुगर लेवल पूरी तरह नियंत्रित है। अपने इस अनुभव के आधार पर उन्होंने आमजन और साथी किसानों को अपने दैनिक भोजन में जौ (Barley) और चने (Gram) को शामिल करने की सलाह दी है
जानिए जौ और चने का महत्व: जौ और चना फाइबर से भरपूर होते हैं, जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम होता है। यह खून में ग्लूकोज के स्तर को अचानक बढ़ने नहीं देता, जो शुगर मरीजों के लिए रामबाण है। जौ और चने में कीड़े (डंकी/सुरसली) जल्दी लगते हैं। चने को टंकी में छानकर बालू रेत डालकर रखने से कीड़ा नहीं लगता। इसी प्रकार जौ के सही रख-रखाव और सुरक्षा के देशी तरीकों पर विचार किया जा रहा है।
एक एकड़ में मल्टी-क्रॉपिंग मॉडल: फल, सब्जियां और औषधीय पौधे लगाने की तैयारी
स्वास्थ्य सुधार के बाद अब एक एकड़ (8 कनाल) भूमि पर प्राकृतिक खेती का एक मॉडल तैयार किया जा रहा है। एक बीघा (2 कनाल) में देशी किस्म का जौ उगाया जाएगा, जिसे एक बार पशुओं के लिए हरे चारे के रूप में काटकर इस्तेमाल किया जा सकता है और दोबारा फुटाव (Regrowth) होने पर अनाज की बढ़िया पैदावार ली जा सकती है।
जैविक और औषधीय खेती: इसी एक एकड़ परिसर में घर की जरूरतों के लिए जौ, चना, राई, धनिया, पालक, मेथी, पुदीना, अदरक के साथ-साथ शतावरी, अश्वगंधा, तुलसी और एलोवेरा जैसे औषधीय पौधों की योजना बनाई गई है। क्षेत्र के किसानों और स्वास्थ्य प्रेमियों से इस जैविक एवं प्राकृतिक जीवनशैली मॉडल पर अपने सुझाव साझा करने का आह्वान भी किया गया है।
प्रस्तुति कृष्ण यादव निमोठ मोबाइल: 90509811100












