रेवाड़ी: (Best24News): भारतीय सेना की गौरवशाली एवं साहसी बटालियन 7 कुमाऊँ, जिसे सैन्य जगत में ‘सतवीर पलटन’ के नाम से पहचाना जाता है, का 64वाँ स्थापना दिवस लोटस गार्डन, कुंड में बड़े उत्साह, सैन्य परंपराओं और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। इस मौके पर बटालियन के सेवारत व पूर्व अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों (JCOs) और अन्य रैंकों के वीरों ने हिस्सा लिया। बटालियन का प्रेरणादायी ध्येय वाक्य है— “हम राही रण के—ऑल द वे टू बैटल।”
अमर शहीदों को नमन व माँ कालिका की पूजा से हुआ शुभारंभ
समारोह में मेजर (डॉ.) टी.सी. राव (पूर्व 7 कुमाऊँ एवं संयोजक, शहीद परिवार कल्याण फाउंडेशन) तथा मेजर देवेंद्र यादव (मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री) विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे:
कार्यक्रम की शुरुआत मातृभूमि पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
रेजिमेंटल गीत व पूजा: बटालियन का रेजिमेंटल गीत “वीर पलटन की तुम सुनो एक जुबानी” गाया गया, जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और माँ कालिका की पूजा-अर्चना हुई। पूरा परिसर “कालिका माता की जय” और “भारत माता की जय” के उद्घोषों से गूंज उठा। कार्यक्रम का मंच संचालन कैप्टन लायक राम यादव ने बेहतरीन ढंग से किया।
7 कुमाऊँ मेरी ‘दूसरी माँ’, अनुशासन से ही मिली सफलता: मेजर (डॉ.) टी.सी. राव
अपने भावुक संबोधन में मेजर (डॉ.) टी.सी. राव ने कहा कि वे 7 कुमाऊँ को अपनी “दूसरी माँ” मानते हैं। सैन्य सेवा से मिले अनुशासन, संस्कारों और प्रशिक्षण की बदौलत ही वे न केवल समाज सेवा से जुड़े रहे, बल्कि अपने व्यावसायिक संगठन का विस्तार 3 महाद्वीपों और 7 देशों तक कर सके।
उन्होंने ‘सेवनर्स’ (पूर्व सैनिकों) को प्रेरित करते हुए कहा: “उम्र केवल एक संख्या है। कभी भी उम्र को अपने ऊपर हावी न होने दें। सीखने, आगे बढ़ने और समाज सेवा की कोई उम्र सीमा नहीं होती। हमेशा नई चीजें सीखते रहें और खुद को समय के अनुरूप ढालें।”
“सैनिक कभी रिटायर्ड नहीं होता”: मेजर देवेंद्र यादव
मेजर देवेंद्र यादव ने पूर्व सैनिकों से राष्ट्र निर्माण और सामाजिक उत्थान में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक सैनिक भले ही वर्दी उतार दे, लेकिन उसके भीतर का अनुशासन, देशभक्ति और सेवा का जज्बा कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। पूर्व सैनिकों का अनुभव नई पीढ़ी को सही दिशा दे सकता है।
ये रह मौजूद: इस मौके पर कैप्टेन लायक राम, कैप्टन राजेंद्र, कैप्टन बलवंत सिंह, कैप्टन जोरावर सिंह, कैप्टन सतीश कुमार, कैप्टन जसवंत सिंह, कैप्टन बुल्ला राम, कैप्टन बहुत राम, कैप्टन सुनील कुमार, कैप्टन वेद प्रकाश, हवलदार नरेश कुमार तथा हवलदार संजीव कुमार सहित कई दिग्गज पूर्व सैनिक शामिल रहे। सभी ने पुरानी यादें साझा कीं और बटालियन की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने का संकल्प लिया।













