धारूहेड़ा (Best24News): मसानी बैराज और साहबी नदी में गिर रहे जहरीले व गंदे पानी से हलकान रेवाड़ी जिले के 35 से अधिक गांवों के ग्रामीणों का सब्र का बांध सोमवार को टूट गया। सेवानिवृत्त रेंज ऑफिसर (वन विभाग) कमल सिंह यादव, करीब 35 गांवों सरपंचों और प्रमुख ग्रामीणों की अगुवाई में लोगों ने मसानी से रेवाड़ी शहर तक एक विशाल ‘ट्रैक्टर जन-आक्रोश यात्रा’ निकाली। यात्रा जिला सचिवालय रेवाड़ी पहुंची तथा मांगो को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सोपा।
राजेश पायलट चौक पर रोके ट्रैक्टर, पैदल सचिवालय पहुंचे ग्रामीण
बता दे मांगों को लेकर मसानी से शुरू हुआ ट्रैक्टरों का काफिला जैसे ही रेवाड़ी पहुंचा, तो पुलिस प्रशासन सभी ट्रैक्टरों को राजेश पायलट चौक के निकट बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और बैनर-झंडे हाथों में लेकर पैदल व गाड़ियों के जरिए मिनी सचिवालय (DC Office) की ओर बढ़ गए। लोगो का आरोप है कि गंदे पानी के कारण नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो गए है। गुस्साए की बड़ी संख्या में महिलाएं भी ट्रैक्टरों पर सवार होकर हक की आवाज उठाने पहुंचीं। लोगो ने प्रशासन के खिलाफ नारे बाजी भी की।

आधे घंटे के धरने के बाद बाहर आए DC अभिषेक मीणा

सचिवालय पहुंचने पर जब प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई, तो उपायुक्त (DC) अभिषेक मीणा ने बैठक में व्यस्त होने के कारण नगरधीश (CTM) को ज्ञापन लेने भेजा। CTM ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि “डीसी साहब मीटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए मुझे ज्ञापन लेने भेजा है।”
लेकिन ग्रामीणों ने CTM को ज्ञापन देने से साफ इंकार कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा: “हम बकायदा परमिशन लेकर डीसी साहब को ज्ञापन सौंपने आए हैं और ज्ञापन केवल डीसी साहब को ही देंगे, चाहे इसके लिए हमें शाम तक यहीं बैठना पड़े।”
धरने पर बैठे ओर लगाए नारे
जब ग्रामीण सचिवालय के मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी तो डीसी की नींद टूटी। करीब लगभग आधे घंटे चले धरने के बाद आखिरकार डीसी अभिषेक मीणा खुद बाहर आए और ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर ज्ञापन स्वीकार किया।
‘बोरिंग का पानी पशुओं के पीने लायक भी नहीं’ – धीरज यादव
गांव खलियावास से पंचायत समिति सदस्य धीरज यादव ने कि “सरकार ने हमारे गांव में बोरिंग तो करवाया, लेकिन जब उसके पानी की लैब जांच कराई गई तो रिपोर्ट में आया कि वह पानी इंसानों तो दूर, पशुओं के पीने के लायक भी नहीं है। गंदे पानी से फसलें बर्बाद हो रही हैं, लेकिन न मुआयजा मिलता है और न ही सरकार कोई सुनवाई कर रही है।”
‘निखरी में 5 फीट पर आता है हरा गंदा पानी, – कमल यादव
आंदोलन के संयोजक कमल सिंह यादव ने क्षेत्र के भयानक जमीनी हालात बयां करते हुए बताया कि कि 30 से अधिक गांव सीधे तौर पर दूषित जलस्तर से प्रभावित हैं, जिनमें से 10 गांवों का जीवन तो नरक बन चुका है। गांव निखरी में हालत यह है कि मात्र 5 फीट गड्ढा खोदते ही नीचे से हरा और बदबूदार गंदा पानी निकलने लगता है। रिश्तेदारों का गांव में ठहरना मुश्किल हो जाता है और वे शाम को ही वापस भागने का प्रयास करते हैं।
दूषित पानी के कारण गांवों में 50 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के घुटने खराब हो रहे हैं। बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। खलियावास और जीतपुरा में यदि एक दिन सप्लाई का पानी न आए, तो पीने का पानी मोल (बाहर से) खरीदकर लाना पड़ता है।

जानिए क्या रखी मांग
ग्रामीणों ने मांग रखी है कि रेवाड़ी से जड़थल तक मसानी से जोनावास होते हुए पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसके शेष बचे लगभग 6 किलोमीटर के हिस्से में तुरंत पाइपलाइन डालकर आपस में जोड़ा जाए, ताकि सीवरेज व औद्योगिक गंदे पानी को रोका जा सके और जवाहरलाल नेहरू कैनाल के जरिए साफ पानी से वाटर रिचार्जिंग कराई जाए।














