धारूहेड़ा : बुधवार को हुई तेज बारिश के बाद भिवाड़ी की ओर से बड़ी मात्रा में पानी धारूहेड़ा में पहुंच गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि करीब चार फीट ऊंचे बनाए गए रैंप को भी पार कर गया। तेज दबाव के कारण रैंप को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे एक बार फिर दोनों क्षेत्रों के बीच पानी निकासी का मुद्दा चर्चा में आ गया।
दूषित पानी छोड़ने का आरोप
धारूहेड़ा के स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार भारी बारिश के दौरान भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र का दूषित पानी छोड़ दिया जाता है। उनका कहना है कि यही पानी सड़कों और रिहायशी इलाकों में फैल जाता है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
2024 में बना था चार फीट ऊंचा रैंप
इस समस्या को देखते हुए वर्ष 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने क्षेत्र का दौरा किया था। इसके बाद प्रशासन ने अलवर बाईपास पर धारूहेड़ा सीमा में करीब चार फीट ऊंचा रैंप बनाया था, ताकि भिवाड़ी की तरफ से आने वाले पानी को रोका जा सके। इस व्यवस्था से कुछ समय तक राहत जरूर मिली, लेकिन इस बार की बारिश में पानी फिर रैंप पार कर गया।
रैंप हटाने की मांग पहुंची हाई कोर्ट
भिवाड़ी के लोगों का कहना है कि रैंप प्राकृतिक जल निकासी में बाधा बन रहा है। इसी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अदालत की ओर से नियुक्त लोकल कमिश्नर क्षेत्र का दौरा कर लोगों के बयान भी दर्ज कर चुके हैं। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होनी है।
एक दशक पुराना है भिवाड़ी-धारूहेड़ा का विवाद
भिवाड़ी और धारूहेड़ा के बीच बारिश और औद्योगिक क्षेत्र के पानी को लेकर विवाद करीब दस साल से जारी है। हर मानसून में यह मुद्दा फिर सामने आ जाता है और दोनों राज्यों के प्रशासन पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ जाता है।
सरकार ने स्थायी समाधान का किया दावा
सरकारों के अनुसार भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्र का पानी एसटीपी के जरिए निकाला जाएगा, जिसके लिए पाइपलाइन बिछाई जा रही है। वहीं बरसाती पानी को सब बैराज तक पहुंचाकर वहां से ड्रेन-8 में छोड़ा जाएगा। ड्रेन-8 तक पाइपलाइन बिछाने का काम भी शुरू हो चुका है। उम्मीद है कि परियोजना पूरी होने के बाद लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।












