रेवाड़ी: हरियाणा के रेवाड़ी से सामने आया एक मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने जिले के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट और जवाब मांगा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं भेजी गई तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होना पड़ सकता है।
इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर ऐसा कौन-सा मामला है, जिसके चलते आयोग को सीधे जिला प्रशासन के दो सबसे बड़े अधिकारियों को नोटिस जारी करना पड़ा।
शिकायत सीधे राष्ट्रीय आयोग तक कैसे पहुंची?
जानकारी के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कार्रवाई से असंतुष्ट एक महिला सुरक्षा गार्ड ने अपनी शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजी थी। शिकायत में उसने आरोप लगाया कि गंभीर शिकायत देने के बावजूद उसे न्याय नहीं मिला और मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
आयोग ने शिकायत का प्रारंभिक परीक्षण करने के बाद इसे गंभीर मानते हुए रेवाड़ी के DC और SP से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली। अब प्रशासन को 15 दिन के भीतर यह बताना होगा कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई और जांच किस चरण में है।
आखिर क्या हुआ था जिला अस्पताल में?
बताया जा रहा है कि यह मामला 23 मई 2026 का है। उस दिन महिला सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी जिला नागरिक अस्पताल के महिला वार्ड में थी। इसी दौरान अस्पताल का एक डॉक्टर अपने एक रिश्तेदार के साथ महिला वार्ड की ओर पहुंचा।
महिला सुरक्षा गार्ड ने अस्पताल के सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए डॉक्टर के रिश्तेदार को महिला वार्ड में प्रवेश की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।
महिला सुरक्षा गार्ड का आरोप है कि बहस के दौरान उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि विवाद के दौरान उसके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसी आरोप के आधार पर उसने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी।
मामला यहीं नहीं रुका, गवाह ने भी लगाए गंभीर आरोप
घटना के दौरान मौजूद एक अन्य सुरक्षा गार्ड ने महिला गार्ड के पक्ष में गवाही देने का दावा किया। बाद में उसने आरोप लगाया कि गवाही देने के कारण अस्पताल प्रबंधन ने उसे हटाने का नोटिस जारी कर दिया।
उसका कहना है कि केवल सच बोलने और घटना की जानकारी देने की वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। इस आरोप के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया।
आयोग ने किन बिंदुओं पर मांगा जवाब?
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस से पूछा है कि शिकायत मिलने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई, जांच किस स्तर तक पहुंची, आरोपों की सत्यता की जांच कैसे की गई और शिकायतकर्ता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए गए।
आयोग ने यह भी कहा है कि पूरी जांच रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर भेजी जाए। यदि रिपोर्ट समय पर नहीं पहुंचती या जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो संबंधित अधिकारियों को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना पड़ सकता है।
अब प्रशासन की रिपोर्ट पर टिकी हैं सभी की निगाहें
आयोग की सख्ती के बाद अब यह मामला प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। सभी की नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन अपनी जांच में क्या निष्कर्ष निकालता है और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।













