Breaking News: हरियाणा के इन शहरों में धारा 163 लागू, उल्लंघन पर कितनी है सजा ?

On: July 1, 2026 8:42 PM
Follow Us:

Breaking News: हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी की ओर से आगामी 4 व 5 जुलाई को आयोजित होने वाली एचटेट परीक्षा के मद्देनजर हरियाणा के ​सभी जिलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट) परीक्षा-2026 के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन के लिए जिला के सभी परीक्षा केंद्रों के आसपास 200 मीटर के दायरे में धारा 163 लगाई है।

उपायुक्त की ओर से जारी किए गए अपने आदेशों में कहा है कि जिला में 4 व 5 जुलाई को एचटेट परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए परीक्षा के 200 मीटर दायरे में किसी प्रकार का हथियार ले जाने की अनुमति नहीं होगी। परीक्षार्थी के अलावा किसी बाहरी तत्व को सेंटर के समीप खड़ा होने की अनुमति नहीं होगी।Breaking News

4 व 5 जुलाई को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक परीक्षा केंद्रों के आसपास फोटोस्टेट की दुकानें बंद रहेगी साथ ही मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, वाई-फाई और दूसरे पर्सनल हॉटस्पॉट का संचालन नहीं होगा। यह आदेश परीक्षा केंद्र की परीधी में ड्यूटी पर तैनात पुलिसबल व अन्य सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे।

जिलाधीश ने कहा कि इन आदेशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 व अन्य अधिनियम /नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

 

 

धारा 163 क्या है इसे कब लगाया जाता है

भारत में 1 जुलाई 2024 से नए आपराधिक कानून लागू हो चुके हैं, जिससे पुराने CrPC और IPC की जगह नए कानूनों (BNSS और BNS) ने ले ली है। जब “धारा 163” की बात आती है, तो यह मुख्य रूप से BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 163 के बारे में होती है, जिसने पुरानी CrPC की धारा 144 की जगह ली है।Breaking News

 

क्या है धारा 163 ?

यह प्रशासन को मिला एक आपातकालीन अधिकार है। इसके तहत जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या किसी सक्षम कार्यकारी मजिस्ट्रेट को इलाके में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए तत्काल विशेष आदेश जारी करने (पाबंदियां लगाने) का अधिकार मिलता है।

इसे कब लगाया जाता है?

इसे तब लागू किया जाता है जब प्रशासन को अंदेशा होता है कि स्थिति बेकाबू हो सकती है, जिससे लोगों की जान-माल, स्वास्थ्य या इलाके की शांति को खतरा है। प्रमुख स्थितियां इस प्रकार हैं:

  • दंगे या सांप्रदायिक हिंसा की आशंका: चुनाव, त्योहारों, या किसी संवेदनशील मुद्दे के दौरान तनाव की स्थिति में।
  • मानव जीवन या स्वास्थ्य को खतरा: जैसे कोई खतरनाक महामारी या आपदा।
  • हिंसक प्रदर्शन: जब किसी धरने, जुलूस या विरोध-प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने या सार्वजनिक शांति भंग होने का डर हो।
  • इसके लागू होने पर क्या पाबंदियां होती हैं?
  • भीड़ पर रोक: 5 या उससे अधिक लोगों के एक जगह समूह बनाकर इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
  • हथियारों पर प्रतिबंध: किसी भी व्यक्ति को लाठी, डंडा, धारदार हथियार या आग्नेयास्त्र (Firearms) लेकर चलने की मनाही होती है।

जुलूस और रैलियों पर रोक: धरना-प्रदर्शन, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और कई बार इंटरनेट सेवाओं पर भी अस्थायी रोक लगा दी जाती है।

उल्लंघन पर पर कितनी है सजा:
अगर कोई व्यक्ति BNSS की धारा 163 के तहत दिए गए आदेशों को तोड़ता है, तो उस पर BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 223 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसके लिए उसे 6 महीने तक की जेल या जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है।

2. BNS की धारा 163 (अपराध के मामले में)
यदि आपका सवाल अपराध तय करने वाले नए कानून BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 163 के बारे में है, तो यह पुराने IPC की धारा 135 की जगह आई है। यह सैन्य बलों से संबंधित है।Breaking News

यह क्या है और कब लगती है?
यह धारा तब लगाई जाती है जब कोई आम व्यक्ति भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना के किसी अधिकारी या सैनिक को अपनी ड्यूटी छोड़कर भागने (भगोड़ा बनने) के लिए उकसाता है या उसमें उसकी मदद करता है।

सजा: इस अपराध के सिद्ध होने पर दोषी को 2 साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है।

बता दे आम बोलचाल में जिसे हम पहले “धारा 144” कहते थे और जो कर्फ्यू या भीड़ पर पाबंदी के लिए जानी जाती थी, वही अब नए कानून में BNSS की धारा 163 बन गई है।

Harsh Chauhan

हर्ष चौहान Best24News में पत्रकार एवं कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वे हरियाणा, रेवाड़ी, धारूहेड़ा, अपराध, सामाजिक गतिविधियों और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की पिछले 6 साल रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

google-newsGoogle News

Follow Now