हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा और विचार-विमर्श के उद्देश्य से हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। संघ 21 मार्च को Rohtak स्थित कर्मचारी भवन, सुखपुरा चौक में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन करने जा रहा है। यह कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा, जिसमें राज्य, जिला और खंड स्तर के निर्वाचित पदाधिकारी, शिक्षक प्रतिनिधि और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े कई सक्रिय लोग भाग लेंगे। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों, शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षा से जुड़े संगठनों के बीच संवाद को मजबूत करना है, ताकि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की जा सके। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा की नीतियों, पाठ्यक्रम और शिक्षकों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए जाएंगे।
शिक्षा व्यवस्था पर होगा व्यापक मंथन ?
कार्यशाला में शिक्षा से जुड़े कई अहम विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा गया है। बदलते समय के साथ शिक्षा प्रणाली में भी कई बदलाव हो रहे हैं, जिनका प्रभाव सीधे तौर पर छात्रों, शिक्षकों और समाज पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है, जो अपने अनुभव और विचारों के माध्यम से शिक्षकों को नई दिशा देने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीतियों, पाठ्यक्रम के बदलाव और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा यह भी विचार किया जाएगा कि वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षक किस तरह अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा 2023 पर विशेषज्ञ का व्याख्यान ?
कार्यशाला में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अनीता रामपाल मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगी। वह “राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ) 2023” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगी। इस सत्र में एनसीएफ 2023 के विभिन्न पहलुओं, इसके उद्देश्यों और इसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा शिक्षा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, जो स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली सामग्री और शिक्षण पद्धति की दिशा तय करता है। ऐसे में शिक्षकों के लिए इस विषय को समझना बेहद जरूरी है, ताकि वे नए बदलावों के अनुरूप अपनी शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बना सकें।
शहीदी दिवस की प्रासंगिकता पर होगा विमर्श ?
कार्यशाला में केवल शिक्षा नीति ही नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रमोद गौरी “शहीदी दिवस और उसकी वर्तमान दौर में प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान देंगे।
इस सत्र में देश के स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों के बलिदान को याद करते हुए यह चर्चा की जाएगी कि आज के समय में इन मूल्यों को समाज और शिक्षा में किस तरह जीवित रखा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समाज और इतिहास से जुड़े मूल्यों को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम होती है।
टीईटी और शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा ?
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण सत्र स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीएन भारती का होगा। वह “टीईटी के संभावित खतरे और हमारी भूमिका” विषय पर शिक्षकों को संबोधित करेंगे। इस चर्चा में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से जुड़े विभिन्न पहलुओं, इसके प्रभाव और इससे जुड़ी चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि इन परिस्थितियों में शिक्षकों की भूमिका क्या होनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किन कदमों की आवश्यकता है। कार्यक्रम का मंच संचालन हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के महासचिव रामपाल शर्मा द्वारा किया जाएगा। वहीं कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों का स्वागत और समापन संबोधन संघ के राज्याध्यक्ष प्रभु सिंह द्वारा किया जाएगा।
संघ की ओर से सभी शिक्षकों, शिक्षा प्रेमियों और समाज के जागरूक लोगों से अपील की गई है कि वे इस कार्यशाला में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें। उनका कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा और विचार-विमर्श से ही बेहतर समाधान निकल सकते हैं। ऐसे आयोजनों से शिक्षकों के बीच संवाद बढ़ता है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों को नई दिशा मिलती है।

















