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Haryana: घूसखोर JE हरीश का 12 महीने में 6 बार तबादला, जाने किसका था आशीर्वाद

On: February 28, 2026 1:37 PM
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धारूहेड़ा: नगर पालिका के एक कनिष्ठ अभियंता (जेई) का मामला काफी समय से चर्चा में रहा। गिरफ्तारी होने तक व्यवस्था पर उनका भारी प्रभाव रहा और 5 साल के भीतर 23 बार उनका तबादला किया गया, लेकिन हर बार तबादला रुकवाने में वे सफल रहे।

बताया गया है कि करीब पांच साल तक वे नगर पालिका में जेई के पद पर बने रहे और हर बार कुछ ही दिनों में तबादला आदेश रुक जाता था। उनके सिर पर एक प्रभावशाली नेता का हाथ होने की चर्चा रही। चर्चा यह भी बनी हुई है कि आखिर वह बंदा किसी नेता को कमा कर दे रहा था इसलिए बार-बार उसके तबादले धारूहेड़ा कर दिए जाते थे। रेवाड़ी के बढ़पुर के रहने वाले हरिश मंजा हुआ खिलाड़ी है।

नपा धारूहेड़ा के जेई हरीश को रिश्वत मामले में रेवाड़ी अदालत में किया पेश
नपा धारूहेड़ा के जेई हरीश को रिश्वत मामले में रेवाड़ी अदालत में किया पेश

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की गुरुग्राम टीम ने उन्हें 90 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। शिकायत एक ठेकेदार द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसने आरोप लगाया कि बिलों के भुगतान के बदले रिश्वत मांगी गई थी। गिरफ्तारी के बाद नगर पालिका और स्थानीय प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

खबर में यह भी बताया गया है कि लंबे समय तक तबादले रुकवाने और पद पर बने रहने को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे थे। गिरफ्तारी के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर विभागीय स्तर पर भी हलचल मची हुई है।

मोटे कमीशन का खेल: लंबे समय से सरकार दावे कर रही है कि ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया हो गई है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है लेकिन साफ जाहिर है कि वर्तमान सरकार में कमीशन का खेल रुका नहीं है ठेकेदार कमीशन को देना जरूरी है। आलम यह है कि कमीशन केवल अधिकारी ही नहीं बल्कि मंत्रियों तक भी पहुंचा जा रहा है यही कारण है कि ठेकेदारों का जीना हराम हो गया है।

कोन है हरीश: बता दे की रेवाड़ी जिले के गांव बूढ़पुर के रहने वाली हरीश कुमार पहले निजी कंपनी में कर रहे थे . 2008 में वह नगर पालिका में je पद पर कार्यरत है। वह काफी सालों से धारूहेड़ा में रहे जमे रहे। बताया जा रहा है कि डीएमसी की ओर से उनका धारूहेड़ा से कभी बावल तो कभी रेवाड़ी तो कर दिया था। लेकिन उनका राजनीतिक लोगों से ऐसा आशीर्वाद था कि वह तुरंत ही बदली करवाकर धारूहेड़ा आ जाते थे।

अब सवाल यह है कि बार-बार धारूहेड़ा आना क्या दर्शाता है ।क्या धारूहेड़ा में कमीशन का मोटा खेल था या फिर किसी मंत्री की सेटिंग थी जो उसे यहां पर काम कर अपनी जेब भर रहा है। भले ही नगर पालिका घुसखोरी के चलते गिरफ्तार कर लिया हो। लेकिन इससे भ्रष्टाचार रुक जाएगा। क्योंकि कमीशन की यह कड़ी नीचे से लेकर ऊपर तक जुड़ी हुई है।

Sunil Chauhan

मै पिछले दस साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। जल्दी से जल्दी देश की की ताजा खबरे को आम जनता तक पहुंचाने के साथ समस्याओं को उजाकर करना है।

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