Haryana: दिल्ली के बुढेरा गांव के किसानों ने नजफगढ़ झील के आसपास के क्षेत्र और गांव के अन्य हिस्सों के लिए अलग-अलग कलेक्टर रेट के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी है। किसान कहते हैं कि एक ही गांव में दो अलग रेट होना उनके लिए नाइंसाफी है और उन्हें सीधे आर्थिक नुकसान हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए किसानों ने मुख्यमंत्री विंडो में शिकायत दर्ज कराई है और न्याय की मांग की है।
कई गांवों की हजारों एकड़ जमीन नजफगढ़ झील के आसपास डूब क्षेत्र में आती है। एक एनजीओ ने इस इलाके को वेटलैंड (जलभू–भूमि) घोषित करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की है। अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी। किसान इस फैसले की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि झील के पास जमीन का कलेक्टर रेट लगभग ₹2.4 लाख प्रति एकड़ है, जबकि गांव के अन्य हिस्सों में यह ₹1.58 करोड़ प्रति एकड़ निर्धारित है। इतनी बड़ी दर में असमानता के कारण किसान न तो उचित मुआवजा प्राप्त कर पा रहे हैं और न ही अपनी जमीन का सही उपयोग कर पा रहे हैं।
इस साल भारी बारिश और लगातार पानी भरने (वॉटरलॉगिंग) की वजह से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हजारों एकड़ जमीन साल के अधिकांश समय में डूबी रहती है, जिससे सरसों और गेहूं की बुवाई लगभग असंभव हो जाती है। किसान इसे प्राकृतिक समस्याओं और प्रशासनिक उपेक्षा दोनों का परिणाम मानते हैं। यदि इस क्षेत्र को वेटलैंड घोषित कर दिया जाता है, तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि उचित मुआवजा मिलने की संभावना कम होगी। ऐसे में पूरे गांव के लिए एक समान कलेक्टर रेट की मांग और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
किसानों की मांग और चिंता
किसान केवलकृष्णा नंबरदार कहते हैं, “हमारी जमीन वर्षों से पानी में डूबी हुई है, लेकिन कलेक्टर रेट इतना कम रखा गया है कि हम अपना हक नहीं ले पा रहे। अन्य क्षेत्रों में रेट आसमान छू रहे हैं। एक ही गांव में दो कीमतें क्यों हैं?” वहीं, सुधीर वशिष्ठ ने कहा, “कलेक्टर रेट में इतनी असमानता होने पर समान मुआवजा कैसे मिलेगा? यह जलभराव हमारी गलती नहीं है। यह प्राकृतिक और प्रशासनिक समस्या दोनों है, और इसका बोझ किसानों पर क्यों पड़े?”
कृषक कार्तिक ने कहा, “अगर क्षेत्र को वेटलैंड घोषित कर दिया जाता है, तो हमारी जमीन पूरी तरह बेकार हो जाएगी। उचित कलेक्टर रेट के बिना हमें क्या मिलेगा? हमारी भविष्य अधर में है।” वहीं, गगन प्रकाश, वकील और किसान, कहते हैं, “नई पीढ़ी खेती में लौटना चाहती है, लेकिन जब जमीन ही इस्तेमाल लायक नहीं है और मुआवजा भी नहीं मिलता, तो हमने मुख्यमंत्री विंडो में अपील की है कि पूरे गांव के लिए एक समान कलेक्टर रेट लागू किया जाए। सरकार को किसानों के हित में तुरंत निर्णय लेना चाहिए।”
















