Rewari Politics: हरियाणा के रेवाड़ी जिले में मंगलवार को आयोजित एक बड़े सरकारी कार्यक्रम ने विकास कार्यों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के पहले किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन की शुरुआत की।
इस दौरान करीब 121 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। लेकिन पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा विकास योजनाओं से अधिक उन नेताओं की गैरमौजूदगी की रही, जिनकी मौजूदगी की उम्मीद की जा रही थी।
रेवाड़ी में नेताओं की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र
मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री की मौजूदगी वाले इस अहम कार्यक्रम से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के अलावा रेवाड़ी जिले के तीनों विधायक भी नजर नहीं आए। कार्यक्रम में शामिल लोगों और राजनीतिक जानकारों के बीच इसे लेकर दिनभर चर्चाओं का दौर चलता रहा।
कई लोगों ने इसे सामान्य व्यस्तता माना तो कुछ इसे राजनीतिक नजरिए से भी जोड़कर देखने लगे। हालांकि किसी भी नेता की ओर से कार्यक्रम में शामिल न होने का आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।
CM सैनी बोले- किसानों को मिलेगा संगठित होने का फायदा (Rewari Politics)
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है।
उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों को यदि एक मंच पर लाया जाए तो वे खेती की लागत कम करने के साथ-साथ अपनी उपज का बेहतर मूल्य भी हासिल कर सकते हैं। सरकार की कोशिश है कि किसान आधुनिक कृषि व्यवस्था से जुड़ें और नई तकनीकों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
शिवराज सिंह चौहान ने FPO मॉडल को बताया किसानों की ताकत (Rewari Politics)
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आने वाला समय संगठित खेती का है। उन्होंने किसानों से एफपीओ से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि जब किसान समूह बनाकर काम करेंगे तो उनकी बाजार में पहचान मजबूत होगी और वे सीधे बड़ी कंपनियों तक अपनी उपज पहुंचा सकेंगे। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हरियाणा के पहले FPO मिशन से क्या बदलेगा? (Rewari Politics)
एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन किसानों का एक पंजीकृत समूह होता है, जिसमें कई किसान मिलकर खेती, खरीद, बिक्री और प्रोसेसिंग जैसे कार्य करते हैं। इसके माध्यम से किसान खाद, बीज और कृषि यंत्र कम कीमत पर खरीद सकते हैं।
साथ ही फसल की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग कर सीधे बड़े खरीदारों तक पहुंच बना सकते हैं। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
सरकार की ओर से एफपीओ को कृषि यंत्रों, सोलर प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता और सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जाती है। इससे खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलती है।
121 करोड़ की परियोजनाओं से विकास को मिलेगी नई रफ्तार
कार्यक्रम के दौरान बावल क्षेत्र के लिए लगभग 121 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया।
इनमें सड़क, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और अन्य जनसुविधाओं से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
सुरक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह रहा अलर्ट
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। आयोजन स्थल तक पहुंचने वाले विभिन्न मार्गों पर 13 पुलिस नाके स्थापित किए गए।
बम निरोधक दस्ता, दंगा नियंत्रण बल, टियर गैस स्क्वाड और सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई। कार्यक्रम में शामिल किसानों और आम लोगों के लिए पेयजल, छाया और बैठने की समुचित व्यवस्था भी की गई थी।
रेवाड़ी की राजनीति में क्या देता है यह कार्यक्रम संकेत?
रेवाड़ी की राजनीति लंबे समय से प्रदेश में अलग पहचान रखती है। ऐसे में मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री की मौजूदगी वाले इस कार्यक्रम से स्थानीय दिग्गज नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।
हालांकि इसे लेकर किसी तरह का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। फिलहाल किसानों के लिए शुरू हुआ एफपीओ मिशन और नेताओं की गैरमौजूदगी, दोनों ही रेवाड़ी में चर्चा का प्रमुख विषय बने हुए हैं।













