Punjab news: इस राज्य में 2 महीने से नहीं बिकी एक भी शराब की बोतल! जानें क्या है बड़ी वजह

On: May 7, 2025 12:20 PM
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आजादी के बाद से खुड्डा अलीशेर गांव में शराब का कोई ठेका नहीं खोला गया। जब पहली बार दुकान खोलने का फैसला हुआ तो लोगों के विरोध के आगे झुकते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने आखिरकार दुकान को यहां से हटा दिया। पूर्व सरपंच बाबा गुरदयाल सिंह, यूथ क्लब के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उनके गांव खुड्डा अलीशेर में आज तक शराब का कोई ठेका नहीं खोला गया।

पहली बार चुपचाप ऐसा करने का प्रयास किया गया लेकिन लोगों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया, जिसके बाद यह फैसला वापस ले लिया गया है। जिस दुकान को खोलने का फैसला किया गया था, वह एक सरकारी और दो अन्य निजी स्कूलों से थोड़ी दूरी पर है।

वार्ड नंबर 1 के पार्षद गुरचरण सिंह और जसविंदर कौर के नेतृत्व में भारी विरोध के बाद प्रशासन को इसे बंद करना पड़ा। पूर्व पंच कुलविंदर कौर, जगपाल सिंह जग्गा, सिमरनजीत सिंह, अवतार सिंह और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि इस दुकान का गांव के सामाजिक माहौल खासकर स्कूली बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय पूर्व सरपंच दयाल सिंह ने बताया कि शराब के ठेके के तीन तरफ सरकारी स्कूल और दो निजी स्कूल हैं, जो 40 मीटर से भी कम दूरी पर हैं। उन्होंने प्रशासन से भविष्य में यहां कोई शराब का ठेका न खोलने की पुरजोर मांग की।

गांव की महिलाओं और युवाओं ने भी इस फैसले का पुरजोर विरोध किया और दुकान को हटाने की मांग की। पंजाब सरकार ने महज 52 दिन पहले ही ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान शुरू किया है, लेकिन कुछ गांवों ने आपसी एकजुटता दिखाते हुए शराब के खिलाफ ऐसी ही मुहिम पहले ही शुरू कर दी है।

खुड्डा अलीशेर से कुछ दूरी पर स्थित मोहाली जिले के गांव पड़च में कभी भी शराब का ठेका नहीं खुलने दिया गया। 10 साल पहले एक बार यहां शराब का ठेका खोला गया था, लेकिन गांव की महिलाओं और ग्रामीणों ने इसे बंद करवा दिया था।

ग्रामीण गीता देवी और पूर्व सरपंच सुरजीत सिंह ने बताया कि इसके बाद उन्होंने इस गांव में कभी भी शराब का ठेका नहीं खुलने दिया और भविष्य में भी नहीं खुलने देंगे। उन्होंने सख्त फैसला लिया ताकि गांव के लोग शराब से दूर रहें और अपना स्वास्थ्य और पैसा बर्बाद न करें।

 

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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