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Haryana News: 36 किमी लंबी रेस में जीता गोल्ड, दिव्यांग तैराक सुरेंद्र ने अरब सागर में दिखाया जलवा

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36 किमी लंबी रेस में जीता गोल्ड, दिव्यांग तैराक सुरेंद्र ने अरब सागर में दिखाया जलवा
36 किमी लंबी रेस में जीता गोल्ड, दिव्यांग तैराक सुरेंद्र ने अरब सागर में दिखाया जलवा

Haryana News: हरियाणा के लिए एक और गर्व का क्षण सामने आया है। फतेहाबाद जिले के गांव भूथन कलां निवासी दिव्यांग तैराक खिलाड़ी सुरेंद्र ढाका ने मुंबई के समुद्र में आयोजित 36 किलोमीटर की कठिन चैनल स्विम प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि इस अंतरराज्यीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले वह हरियाणा से एकमात्र प्रतिभागी थे, जिन्होंने अपने जज्बे और हौसले से सभी को प्रभावित किया।Haryana News

दिव्यांग ने रचा इतिहास: सुरेंद्र ढाका दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, लेकिन यह कभी भी उनके हौसले के आड़े नहीं आया। उन्होंने तैराकी के क्षेत्र में नेशनल और इंटरनेशनल स्तर की कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर पहले ही अपनी प्रतिभा साबित कर दी है। इस महत्वपूर्ण प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने उनके संघर्ष, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उनकी जीत की कामना की थी, जिसे सुरेंद्र ढाका ने साकार कर दिखाया।

गोल्ड मेडल जीत कर किया नाम रोशन: सुरेंद्र ढाका ने बताया कि यह चैनल स्विम प्रतियोगिता 9 फरवरी को अरब सागर में आयोजित की गई थी। उन्होंने मुंबई के धरमतर जेट्टी से गेटवे ऑफ इंडिया तक करीब 36 किलोमीटर की दूरी तैरकर पूरी की। समुद्र की लहरों, तेज धाराओं और लंबे समय तक लगातार तैरने की चुनौती के बावजूद उन्होंने 9 घंटे 40 मिनट में यह दौड़ पूरी कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह प्रतियोगिता महाराष्ट्र सरकार की स्विमिंग फेडरेशन की ओर से आयोजित की गई थी, जिसमें हरियाणा, गुजरात और मुंबई समेत पांच राज्यों के तैराकों ने भाग लिया।

निरंतर परिश्रम लाया रंग: अपनी सफलता को लेकर सुरेंद्र ढाका ने कहा कि निरंतर परिश्रम और आत्मविश्वास ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने बताया कि अब उनका अगला लक्ष्य वर्ष 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेकर देश के लिए पदक जीतना है। इसके लिए वह पहले से कहीं ज्यादा मेहनत और अभ्यास करेंगे।

हरियाणा के लिए गर्व का विषय: सुरेंद्र ढाका ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों को बहाना बनाकर कभी भी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। यदि सच्ची लगन और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए, तो एक दिन सफलता जरूर कदम चूमती है। उनकी यह उपलब्धि न केवल दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि पूरे हरियाणा के लिए गर्व का विषय भी है।