Haryana News: हरियाणा के रेवाड़ी में ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह पर बावल में आयोजित कार्यम्र्म एक बार चर्चा में आया गया हैं कार्यक्रम में कंद्रीय मंंत्री राव इंद्रजीत, रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण यादव, बावल के विधायक कृष्ण् व कोसली के विधायक अनिल यादव कार्यक्र्म में गायब रहे।Haryana News
हरियाणा के रेवाड़ी में ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह में मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य रूप से शामिल हुए। इयस मौक पर बावल में किसानों के कल्याण, कृषि तकनीक और क्षेत्र के विकास को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए।Haryana News
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मौके रेवाड़ी को बड़ी विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस अभियान का मकसद सिर्फ ज़मीन बचाना नहीं, बल्कि पानी बचाना, मिट्टी की सेहत सुधारना और पर्यावरण की रक्षा करना है।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार द्वारा 864 करोड़ रुपये की सब्सिडी पहले ही 10 लाख 13 हज़ार से ज़्यादा किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और डिजिटल कृषि के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के विकास के लिए 121 करोड़ रुपये की लागत से 11 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया। इनमें 40 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं का उद्घाटन तथा 81 करोड़ रुपये की नौ परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
रेवाड़ी को 121 करोड़ की 11 परियोजनाओं की सौगात
बता दे रेवाड़ी विकास को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री ने कुल 121 करोड़ रुपये की लागत वाली 11 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। खास तौर पर बावल के लिए 40 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ। 81 करोड़ रुपये की लागत वाली नौ नई परियोजनाओं की नींव रखी गई।
आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल पर फोकस: शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार अब खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है। कहा कि आने वाले समय में किसान भाइयों को फिजिकल सॉइल हेल्थ कार्ड बनवाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, सब कुछ डिजिटल होगा। अल-नीनो के कारण पानी की कमी से निपटने के लिए नई रणनीतियों पर काम चल रहा है। ऐसे बीजों का इंतजाम किया जा रहा है जो कम पानी में भी जल्दी तैयार हो सकें और बंपर पैदावार दे सकें।












