Delhi एयरपोर्ट पर ATC सिस्टम फेल! 6 नवंबर को सॉफ्टवेयर खराबी से हज़ारों उड़ानों में बड़ी देरी, जानिए क्या हुआ

On: March 21, 2026 7:56 PM
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Delhi एयरपोर्ट पर ATC सिस्टम फेल! 6 नवंबर को सॉफ्टवेयर खराबी से हज़ारों उड़ानों में बड़ी देरी, जानिए क्या हुआ

Delhi: केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने हाल ही में सांसदों द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में बताया कि 6 नवंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) संचालन में सॉफ्टवेयर से जुड़ी गड़बड़ी के कारण हवाई यातायात सेवा संदेशों के प्रसंस्करण और डिलीवरी में गंभीर विलंब देखा गया। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण दो दिनों में सैकड़ों उड़ानों की समयबद्धता प्रभावित हुई और हवाई संचालन पर बड़ा असर पड़ा।

सिविल एविएशन मंत्रालय ने स्वीकार किया कि एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट ऑटोमेशन सिस्टम (ATMAS) में तकनीकी गड़बड़ी के कारण महत्वपूर्ण एयर ट्रैफिक संदेश, जैसे फ्लाइट प्लान, आवश्यक फ्लाइट सूचना केंद्र (FIC) नंबर और एयर डिफेंस क्लियरेंस में देरी हुई। इस दौरान लगभग 800 उड़ानों के विलंब की सूचना मिली थी। हालांकि मंत्री ने स्पष्ट किया कि 6 से 8 नवंबर के बीच केवल 397 निर्धारित पैसेंजर फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। इस तकनीकी खराबी से यात्रियों के अलावा एयरलाइंस को भी अप्रत्याशित परेशानी और संचालन में बाधा का सामना करना पड़ा।

भविष्य में ऐसी गड़बड़ी से बचने के उपाय

केंद्रीय सरकार ने बताया कि एअरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने मौजूदा IP-आधारित ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) को बदलकर नया एयर ट्रैफिक सर्विसेज मैसेज हैंडलिंग सिस्टम (AMHS) स्थापित करने का आदेश दिया है। इसका उद्देश्य संचालन की विश्वसनीयता को बढ़ाना और तकनीकी गड़बड़ियों से भविष्य में उत्पन्न होने वाले विलंब को रोकना है। नई प्रणाली के लागू होने के बाद एयर ट्रैफिक संदेशों का प्रसंस्करण अधिक तेज और भरोसेमंद होगा।

एयरलाइंस के आर्थिक नुकसान और जिम्मेदारी

मंत्री मुरलीधर मोहोल ने यह भी बताया कि मौसम, ट्रैफिक जाम या तकनीकी खराबी जैसी स्थितियों में एयरलाइंस को अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है। इसलिए किसी एक कारण के आधार पर एयरलाइंस के आर्थिक नुकसान का सही अनुमान लगाना संभव नहीं है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि तकनीकी गड़बड़ियों और अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने के लिए एयरलाइंस और हवाई अड्डा दोनों को मिलकर उपाय करने की आवश्यकता है, ताकि यात्रियों और उड़ानों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

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