रेवाड़ी (Best24News): हरियाणा सरकार ग्रामीणों को स्वस्थ रखने और खेल-कूद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई ओपन जिम लगा रही है। हरियाणा के रेवाड़ी जिले में एक अनोखा मामला देखने को मिला है। पंचायत की ओर करीब 8 लाख रूप्ए की लागत से भाडावास गांव में शमशान घाट ही जिम लगा दी है। साफ जाहिर कि अब रेवाड़ी में दिन में गांव के लोग ओर रात को मुर्दे कसरत कर सकेंगे। इस जिम का मामला अब सीएम सरकार तब पहुंच गया है। अब सवाल यह है कि कोई अधिकारी इस निर्णय को लेकर क्या कार्रवाई करते है।
टीनशेड में लागई जिम: भाडावास गावं में पूरी टीन शेड में जिम के उपकरण लगा दिए गए है।अजीब बात यह है कि जिम के उपकरण उसी टीनशेड के नीचे लगा दिए गए हैं, जहां अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। ऐसे में अब अंतिम संस्कार के दौरान आने वाले ग्रामीणों को बैठने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
8 लाख रुपये खर्च, लेकिन इस्तेमाल शून्य
शाहजहांपुर रोड के किनारे गांव की करीब आधा एकड़ श्मशान भूमि स्थित है, जहां वर्षों से अंतिम संस्कार होते आ रहे हैं। परिसर में कुल तीन टीनशेड हैं—जिनमें से दो अंतिम संस्कार के लिए और एक लोगों के बैठने के लिए था। करीब चार महीने पहले पंचायत ने इसी परिसर में ओपन जिम का काम शुरू कराया और टाइल बिछाकर उपकरण लगवा दिए। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 8 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। गांव से बाहर और श्मशान भूमि के अंदर होने के कारण ग्रामीण, युवा और बच्चे यहां व्यायाम करने जाने से कतरा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह 8 लाख रुपये गांव के अंदर किसी सार्वजनिक स्थान पर खर्च किए जाते तो इसका लाभ युवाओं और बुजुर्गों को मिलता, लेकिन अब यह सरकारी पैसे की बर्बादी साबित हो रही है।
सरपंच सुनील कुमार का पक्ष: गांव के सरपंच सुनील कुमार का कहना है कि सरकारी निर्देशों के तहत ओपन जिम के लिए करीब 450 वर्गगज जमीन की जरूरत थी। पंचायत के पास गांव में अन्य किसी जगह पर इतनी जमीन उपलब्ध नहीं थी, इसीलिए श्मशान भूमि में जिम बनाने का निर्णय लिया गया।
अधिकारियों का बयान: इस मामले पर डीडीपीओ नरेंद्र सारनवान ने बताया कि श्मशान भूमि के अंदर ओपन जिम बनाए जाने का मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। इस पूरे मामले की विभागीय जांच करवाई जाएगी और जांच के बाद नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह 8 लाख रुपये गांव के अंदर किसी सार्वजनिक स्थान पर खर्च किए जाते तो इसका लाभ युवाओं और बुजुर्गों को मिलता, लेकिन अब यह सरकारी पैसे की बर्बादी साबित हो रही है।











