रेवाड़ी में जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते पशुपालकों की दादा गिरी बढती ही जा रही है। ऐसा काई पहली बार नहीं हुआ है। हर दिन पशुपालक जबरदस्ती पशु पकडने वाली एजेंसी से अपनी दुधारू पशु छुडवा ले जाते है। वीडियो फोटो भी एजेंस की ओर से प्रशासन को दी जा रही है फिर प्रशासन कोई कार्रवाई नही कर रहा है।
एजेंसी मजूबर, प्रशासन मौन: बार पशु छुडवाने को लेकर एजेंसी वाले मजबूर है तो बार बार पशुओं पकड रहे है वही प्रशासन कार्रवाइ के नाम पर कुछ नही कर रहा है। यही कारण है आये दिन रेवाड़ी में बेसहारा पशुओं की समस्या पर प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद स्थिति काबू में आती नहीं दिख रही है। पांच दिन में पशुओं के हमले से दो लोगों की मौत और प्रशासन की चेतावनी के बाद भी कुछ पशुपालक बेखौफ नजर आ रहे हैं। एक बार फिर रेवाड़ी में जबरदस्ती पशुपालक अपने पशुओ को छुडवा ले गए।

रेवाड़ी में पशु पकडने वाली एजेंसी से पकडी गई गायो केा जबरदस्ती छुडवाते हुए पशु पालक
पशुपालकों की दादागिरी: रेवाड़ी मे एक बार फिर पशु छुड़ाने के दौरान कुछ पशुपालक बेखौफ नजर आए। वे पशु पकउने वाली गाडी के पास पहुंचे और कर्मचारियों की मौजूदगी में रस्सियां खोलकर पशुओं को अपने साथ ले गए। इस दौरान कर्मचारी उन्हें रोकने में प्रयास किया लेकिन उनकी दादागिरी के चलते वह कुछ नही कर सके। लगातार ऐसी घटनाओं के चलते पशु पकड़ने वाले कर्मचारियों में भी डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
केवल कागजों में कार्रवाई: भले पशु पकडने वाली एजेंसी के ठेकेदार देवेंद्र की शिकायत पर शहर थाना पुलिस ने 17 अगस्त को गुजरवाड़ा निवासी इंद्र गुर्जर, मलखान गुर्जर और फरसा गुर्जर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है हो हालांकि, 5 दिन बीतने के बाद भी तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीे: लेकिन अहम बात यह है कैप्टन जगराम यादव की मौत के मामले में भी 15 दिन बाद तक केस दर्ज नहीं किया गया है। दोषियों पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन पता हीं क्यों गंभीर नही है। रेवाड़ी में बेसहारा पशुओं के हमले से पांच दिन के भीतर दो लोगों की मौत हो चुकी है। 5 अगस्त को सेक्टर-4 निवासी कैप्टन जगराम यादव सब्जी लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान गाय और सांड ने उन पर हमला कर दिया। वे स्कूटी समेत सड़क पर गिर गए और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
इसके बाद 11 अगस्त को माता चौक के पास प्रताप सिंह यादव पर गायों के झुंड ने हमला किया। गंभीर रूप से घायल प्रताप सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बार बार एजेंसी कर्मचारियों पर बना जा रहा दबाब: पशुओं को पकडने को लेकर बार दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन दो पशुपालक ठेकेदार के कर्मचारियों से पशु छुडवा कर ले जाते है उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती। नगर परिषद के ठेकेदार के कर्मचारियों ने रविवार से फेज-2 क्षेत्र में दोबारा बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया था। पहले दिन पशुपालकों ने कर्मचारियों से चार पशु छुड़वा लिए। सोमवार देर शाम माता चौक पर पशुओं के हमले में प्रताप सिंह यादव की मौत के बाद तीन पशुपालकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
बुधवार को पकडे 12 पशु: बुधवार को कर्मचारियों ने अभियान चलाकर करीब 12 पशु पकड़े। इनमें से एक गाय को पशुपालक वैन में चढ़ने के बाद छुड़ाकर ले गए। वीरवार को भी पशुपालकों ने कर्मचारियों को धमकाकर वैन से दूर किया और उसका दरवाजा खोलकर पशुओं को उतार लिया। आलम यहां तक कि पशुपालकों को प्रशासन का कोई भय नहीं है। दादा गिरी कहे या फिर गुंडागर्दी । प्रशासन की ओर से बार बार केवल कार्रवाइ के नाम पर खानापूर्ति क्यों की जा रही है।
पशु पकड़ने वाली टीम के कर्मचारियों के सामने से ही वैन का दरवाजा खोलकर पशुओं को छुड़ाकर ले जाने के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में महिलाएं भी पशु छुड़ाने में शामिल नजर आईं। पिछले दो दिनों में ऐसे 2 मामले सामने आ चुके हैं।












