धारूहेड़ा : सेक्टर-6 स्थित सामुदायिक भवन में श्रीमद् भागवत कथा सेवा समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा के तीसरे दिन कथा वाचक बाल कृष्ण महाराज ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग की संगीतमय व्याख्या की तथा शिव रात्रि के महत्त्व पर प्रकाश डाला।
श्री धाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथा व्यास बाल कृष्ण महाराज ने व्यासपीठ से कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल दो देवशक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है।

कथा के दौरान जब भगवान शिव की अनोखी बारात और शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया गया, तो पूरा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारों से गूंज उठा। । समिति के संयोजक डीके शर्मा ने बताया कथा रोजाना 3 से 7 बजे तक होगी। 16 अगस्त को समापन दिवस पर पूर्णाहुति के हवन व भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
शिव रात्रि पूजा का महत्त्व: शिवरात्रि की पूजा अंधकार और अज्ञान को दूर करने, मानसिक शांति पाने और आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने का सबसे बड़ा अवसर मानी जाती है। इस दिन सच्चे मन से व्रत और अभिषेक करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं तथा भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक और आध्यात्मिक महत्वऊर्जा का संचार होता है। योग और ज्योतिष के अनुसार शिवरात्रि की रात शरीर में ऊर्जा का प्रवाह प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर होता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पुराने कर्मों का असर कम होता है और शुद्धि मिलती है।

शिव-शक्ति का मिलन: इसे शिव और शक्ति के विवाह या शिव के प्रलय/सृष्टि रूप का प्रतीक माना जाता है।विषपान की कथा: समुद्र मंथन के दौरान सृष्टि की रक्षा के लिए शिव जी द्वारा विष पीने की घटना को भी इस पर्व से जोड़ा जाता है।
मुख्य पूजन विधि व नियम जलाभिषेक: शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक किया जाता है।प्रिय वस्तुएं: शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, भांग, और अक्षत (चावल) बेहद प्रिय हैं।रात्रि जागरण: इस रात को जागकर ‘ऊँ नमः शिवाय’ का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है।














