Special Lok Adalats: रेवाड़ी वालों के लिए बडी खुशी की खबर है। लंबे समय अधर में लटके चैक चेक बाउंस (एन.आई. एक्ट)के मामलो की सुनवाई को लेकर स्पेशल लोक अदालत लगाई जा रही है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 18 जुलाई (शनिवार) को जिला में रेवाड़ी, बावल, कोसली न्यायिक परिसर में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। Special Lok Adalats
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा की ओर स स्पेशल जिला में रेवाड़ी, बावल, कोसली न्यायिक परिसर अदालत लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य न्यायालयों में लंबित चेक बाउंस (एन.आई. एक्ट) से जुड़े मामलों का आपसी सहमति और समझौते के आधार पर अंतिम समाधान करना है।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डॉ. रेनू सोलखे ने बताया कि इस स्पेशल लोक अदालत का उद्देश्य लंबित चेक बाउंस (एन.आई. एक्ट) से जुड़े मामलों का आपसी सहमति और समझौते के आधार पर अंतिम समाधान करना है।
बता दे कि अदालत के माध्यम से पक्षकार बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के अपने विवाद का शांतिपूर्ण समाधान कर सकते हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत होती है और अदालतों पर मामलों का बोझ भी कम होता है।
लोक अदालत के फायदे
लोक अदालत (Lok Adalat) का मुख्य फायदा यह है कि इसमें कोई कोर्ट फीस नहीं लगती। यदि नियमित कोर्ट में फीस जमा है, तो मामला सुलझने पर वह भी वापस मिल जाती है। इसमें मुकदमों का तुरंत निपटारा होता है, वकील का खर्च बचता है, और आपसी सहमति से दोनों पक्षों के विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं। सबसे अहम बात यह बार बार कोर्ट के चक्कर लगाने से भी झंझट खत्म हो जाता है।
लोक आदालतों से लाभ
- वकील पर खर्च नहीं होता।
- कोर्ट-फीस नहीं लगती।
- पुराने मुकदमें की कोर्ट-फीस वापस हो जाती है।
- किसी पक्ष को सजा नहीं होती। मामले को बातचीत द्वारा सफाई से हल कर लिया जाता है।
- मुआवजा और हर्जाना तुरन्त मिल जाता है।
- मामले का निपटारा तुरन्त हो जाता है।
- सभी को आसानी से न्याय मिल जाता है।
- फैसला अन्तिम होता है।
जानिए कौन कौन से मामलों को होता है निपटारा
लोक अदालत में दोनों पक्षों की आपसी सहमति और समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा किया जाता है। यहाँ मुख्य रूप से चेक बाउंस (N.I. Act), मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा, बैंक लोन वसूली, बिजली-पानी के बिल संबंधी विवाद, भूमि व संपत्ति विवाद, पारिवारिक मामले (तलाक, भरण-पोषण), और छोटे-मोटे आपराधिक मामलों का समाधान होता है। इतना ही हर विवाद के लिए अलग अलग लोक अदालत लगाई जाती है।
लोक अदालत की क्या होती है पावर
लोक अदालत के पास सिविल न्यायालय के समान पावार होंतर है। यह सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत शासित होगी। इसके पास किसी गवाह को तलब करने और उसकी उपस्थिति को अनिवार्य बनाने की शक्ति है। किसी विशेष मामले के संबंध में साक्ष्य प्राप्त करने का अधिकार भी है।













