Breaking News: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। जिस पल का इंतजार देश की करोड़ों जनता और रेल प्रेमी लंबे समय से कर रहे थे, वह आखिरकार वह समय आ गया है। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (नमो ग्रीन रेल) ने शुक्रवार को अपने सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल की शुरुआत कर दी है। पर्यावरण के अनुकूल और पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त इस ट्रेन का सफर भारतीय परिवहन व्यवस्था की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा।Breaking News
भारतीय रेलवे ने तकनीकी क्रांति की दिशा में एक नया और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। रेलवे ने हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर देश की पहली पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) का अंतिम और सफल हाई-स्पीड ट्रायल (High-Speed Trial) पूरा कर लिया है। शून्य प्रदूषण वाले भविष्य की ओर बढ़ते हुए इस स्वदेशी इंजन ने परीक्षण के दौरान पटरियों पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है।
#WATCH | हरियाणा: आज दिल्ली और जींद के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल रन हुआ। इस ट्रायल में इमरजेंसी ब्रेकिंग दूरी और ऑसिलेशन पर ध्यान दिया गया।
(सोर्स: भारतीय रेलवे) pic.twitter.com/D8GUpCDhvk
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 26, 2026
हाई-स्पीड ट्रायल सफलता पूर्वक संपन्न
दिल्ली मुख्यालय से आए प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में रेलवे अधिकारियों और तकनीकी विंग ने ट्रेन की वायरिंग, बैलेंसिंग, सिग्नल और ब्रेकिंग सिस्टम जैसे कड़े सुरक्षा मानकों को बारीकी से परखा। पुरानी दिल्ली-सोनीपत रूट पर शुक्रवार को इस अत्याधुनिक ट्रेन का अंतिम चरण का हाई-स्पीड ट्रायल सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।Breaking News
दो डीजल इंजनों के सहारे जींद से दिल्ली रवाना
बता दे अपने पहले ट्रायल के दिन जींद रेलवे स्टेशन से यह आधुनिक ट्रेन को रवाना हुई। इस अंतिम ट्रायल के शुरुआती चरण में ट्रेन को दो डीजल इंजनों के साथ जोड़कर जींद से दिल्ली के लिए रवाना किया गया। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष टीम इस पूरे सफर के दौरान ट्रेन की हर तकनीकी बारीकी, संतुलन और सुरक्षा मानकों पर पैनी नजर बनाए हुए है।Hydrogen Train)

क्या है इस ‘नमो ग्रीन रेल’ की खासियत?
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन से चलने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से ‘इको-फ्रेंडली’ है। यह पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तरह धुआं नहीं छोड़ती, बल्कि इसके साइलेंसर से सिर्फ पानी और भाप निकलती है। इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी। इस सफल ट्रायल के बाद जल्द ही आम जनता के लिए इस ट्रेन के पहिए पटरियों पर दौड़ते नजर आएंगे।Breaking News
चार राउंड में इस गति से दौड़ी ट्रेन
| ट्रायल राउंड (Trial Round) | ट्रेन की रफ्तार (Speed) |
|---|---|
| पहला राउंड | 85 किमी/घंटा |
| दूसरा राउंड | 100 किमी/घंटा |
| तीसरा राउंड | 110 किमी/घंटा |
| चौथा राउंड (हाई-स्पीड) | 120 किमी/घंटा |
सुबह 9:10 बजे जींद से दो डीजल इंजनों के सहारे 75 किमी/घंटा की गति से दिल्ली ले जाई गई इस ट्रेन ने दोपहर करीब 12 बजे के बाद सोनीपत के लिए अपना ट्रायल सफर शुरू किया। बता दें कि 1:25 बजे सोनीपत स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 3 पर पहुंचने के बाद ट्रेन को 29 मिनट रोका गया था ताकि वंदे भारत सहित 3 एक्सप्रेस ट्रेनों को रास्ता दिया जा सके।Breaking News
दिल्ली-सोनीपत रेलखंड पर दिखेगी 120 kmp की रफ्तार
यह ट्रेन जैसे ही देश की राजधानी दिल्ली पहुंचेगी, इसके बाद इसका असली और सबसे बड़ा इम्तिहान शुरू होगा। दिल्ली-सोनीपत रेलखंड पर इस हाइड्रोजन ट्रेन को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से दौड़ाकर इसका कड़ा परीक्षण किया जाएगा। इस हाई-स्पीड ट्रायल का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि तेज गति में ट्रेन का इंजन, ब्रेकिंग सिस्टम और हाइड्रोजन ईंधन की खपत किस तरह काम करती है।Breaking News
प्रदूषण से मुक्ति: पारंपरिक डीजल ट्रेनों के विपरीत, हाइड्रोजन ट्रेनें पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होती हैं। इसमें ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग होता है, जिससे धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप (Water Vapor) उत्सर्जित होती है।
अहीरवाल और पूरे हरियाणा में उत्साह: देश की इस पहली ऐतिहासिक तकनीक का सफल प्रयोग हरियाणा की पटरियों पर होने से क्षेत्र के लोगों और रेल यात्रियों में भारी उत्साह है। जल्द ही इस रूट पर इस ट्रेन का कमर्शियल (व्यावसायिक) संचालन शुरू कर दिया जाएगा।













