Haryana News: गुरुग्राम: गांवों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हरियाणा के गुरूग्राम जिले के बालूदा गांव की बेटी काम्या भारद्वाज ने लंबी दूरी की तैराकी में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर न सिर्फ अपने गांव और जिले, बल्कि पूरे हरियाणा का नाम रोशन किया है। इससे साफ जाहिर है कि प्रतिभा गांवों में छीपी हुई है।Haryana News
गुरुग्राम के बालूदा गांव की युवा तैराक काम्या भारद्वाज ने 79वीं वर्ल्ड लॉन्गेस्ट 81 किलोमीटर स्विमिंग चैम्पियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर दूसरा स्थान हासिल किया। काम्या भारद्वाज ने लगातार 81 किलोमीटर की स्विमिंग पूरी कर नया रिकॉर्ड अपने नाम किया है। उनकी इस उपलब्धि को खेल जगत में बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इतनी लंबी दूरी की तैराकी के लिए शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक मजबूती और अनुशासन की भी जरूरत होती है।Haryana News
बेटियां करेंगी विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पूरा: हरियाणा की बेटियां खेल, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा से देश को गौरवान्वित कर रही हैं। मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में हरियाणा की बेटियों और युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान होगा।Haryana News
इंटरनेशनल प्रतियोगिता में दूसरा स्थान बड़ा अचीवमेंट: उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अपने कार्यालय में काम्या भारद्वाज से मुलाकात की और उन्हें इस शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई दी। मंत्री ने कहा कि इस चैम्पियनशिप में दुनिया भर के तैराकों ने हिस्सा लिया था। ऐसे में काम्या का दूसरा स्थान हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि है। उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दी बधाई: काम्या भारद्वाज की इस सफलता पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि काम्या की यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है और इससे यह संदेश जाता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
गांव बालूदा में भी खुशी का माहौल: 81 किलोमीटर की इस चुनौतीपूर्ण तैराकी के दौरान काम्या को कई तरह की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार अभ्यास, कोच का मार्गदर्शन और परिवार का सहयोग उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत रहा। काम्या की इस उपलब्धि से गांव बालूदा में भी खुशी का माहौल है और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई बांटकर जश्न मनाया।
रचा इतिहास: गुरूग्राम की बेटी काम्या भारद्वाज की इस उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली बेटियां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। उनकी सफलता से न केवल युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी, बल्कि अभिभावकों का भी बेटियों के खेल में आगे बढ़ने के प्रति भरोसा और मजबूत होगा।

















