Haryana: हरियाणा में बड़ी कार्रवाई! 68 डॉक्टरों की एक झटके में छुट्टी, स्वास्थ्य विभाग ने दिखाई सख्ती!

On: March 21, 2026 8:28 PM
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Haryana: हरियाणा में बड़ी कार्रवाई! 68 डॉक्टरों की एक झटके में छुट्टी, स्वास्थ्य विभाग ने दिखाई सख्ती!

Haryana: हरियाणा सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे डॉक्टरों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 2017 से लगातार गैरहाजिर चल रहे 68 मेडिकल अधिकारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। विभाग के अनुसार, ये डॉक्टर नियुक्ति के कुछ समय बाद बिना किसी सूचना या अनुमति के अपने कार्यस्थल से गायब हो गए थे। सरकार द्वारा कई बार नोटिस और चेतावनी दिए जाने के बावजूद इन डॉक्टरों ने कोई जवाब नहीं दिया। आखिरकार, स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने इन सभी डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए। अब उनकी जगह नए डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए विभाग जल्द विज्ञापन जारी करने की तैयारी में है।

सूत्रों के मुताबिक, जिन डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई है, वे सिविल अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और उपमंडल अस्पतालों (SDH) में कार्यरत थे। इनमें से एक डॉक्टर 2017 से, दस डॉक्टर 2018 से, दो 2019 से, दस 2020 से, आठ 2021 से, सोलह 2022 से, सत्रह 2023 से और चार डॉक्टर 2024 से ड्यूटी पर नहीं पहुंचे थे। इनकी अनुपस्थिति के कारण कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो रही थीं। खासकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को डॉक्टरों की कमी से जूझना पड़ रहा था। विभाग ने बार-बार संपर्क करने, पत्र भेजने और जवाब मांगने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी प्रतिक्रिया नहीं दी। यह स्थिति स्वास्थ्य प्रणाली की कार्यकुशलता पर सवाल खड़े कर रही थी, जिसके चलते सरकार को यह सख्त फैसला लेना पड़ा।

सिविल चिकित्सा सेवाएं नियम 2014 के तहत की गई कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग ने इन डॉक्टरों के खिलाफ सिविल चिकित्सा सेवाएं (श्रेणी-1) नियम 2014 के नियम 10 के तहत कार्रवाई की है। इस नियम के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी बिना अनुमति के लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है और बार-बार के नोटिस के बावजूद जवाब नहीं देता, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। विभाग का कहना है कि यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही बनाए रखने के लिए आवश्यक था। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही या गैर-जिम्मेदाराना रवैये को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग अब यह सुनिश्चित करेगा कि सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता रहे, ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

कम वेतन और खराब सुविधाएं बनीं नौकरी छोड़ने की वजह

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डॉक्टरों के ड्यूटी छोड़ने के पीछे कई कारण हैं। अन्य राज्यों की तुलना में कम वेतन, पदोन्नति के सीमित अवसर, ग्रामीण इलाकों में रहने की असुविधा, कार्य परिस्थितियों की खराब स्थिति, और मेडिको-लीगल मामलों में लगातार उलझनें प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा, कई डॉक्टरों को उच्च अध्ययन (PG या सुपर स्पेशलाइजेशन) के लिए आवश्यक एनओसी (No Objection Certificate) भी समय पर नहीं मिल पाती, जिससे वे निराश होकर नौकरी छोड़ देते हैं। स्वास्थ्य विभाग अब इन समस्याओं की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में योग्य डॉक्टर राज्य की सेवा में बने रहें और ग्रामीण क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें। सरकार का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक अनुशासित और जिम्मेदार बनाया जाएगा।

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