Haryana: बिहार में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गर्मी हरियाणा में भी महसूस की जा रही है। इस बार कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के नक्शेकदम पर चलते हुए सक्रियता दिखाई है। हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र के निर्देश पर राज्य के सभी जिला अध्यक्ष और उनकी टीमें बिहार मूल के लोगों से संपर्क कर रही हैं और उन्हें कांग्रेस समर्थित गठबंधन उम्मीदवारों के लिए वोट देने का आह्वान कर रही हैं।
कांग्रेस नेता न केवल लोगों से संपर्क कर रहे हैं, बल्कि छठ पूजा के लिए तैयार किए गए घाटों का निरीक्षण भी कर रहे हैं। कई जिला अध्यक्ष विशेष रूप से लोगों को सुविधा देने और पूजा स्थलों पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने में सक्रिय हैं। इसका उद्देश्य न केवल वोटरों से संपर्क करना है, बल्कि उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को भी समझना है।
भाजपा का पहले से सक्रिय होना
भाजपा ने इससे पहले ही हरियाणा के शहरों में रहने वाले लगभग एक लाख प्रवासी लोगों, विशेष रूप से पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार) मूल के निवासियों, तक पहुंच बनाई थी। भाजपा के लिए बिहार चुनाव वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन कांग्रेस के लिए भी यह कोई कम चुनौती नहीं है।
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार में “वोटर राइट्स यात्रा” की थी। उन्होंने लगभग पंद्रह दिन बिहार में बिताए, कई जिलों का दौरा किया और भाजपा पर वोट चोरी का आरोप लगाया। कांग्रेस का यह प्रयास बिहार में पार्टी की विश्वसनीयता और नेतृत्व को मजबूत दिखाने की रणनीति का हिस्सा है।
हरियाणा कांग्रेस की सक्रियता
हरियाणा इकाई ने अपने नेताओं की सक्रियता बढ़ा दी है और बिहार चुनाव में अपनी भूमिका को प्रभावी बनाने का प्रयास किया है। जिला अध्यक्ष और उनकी टीमें लगातार लोगों से मिल रही हैं और गठबंधन उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार कर रही हैं। यह देखा जाना बाकी है कि हरियाणा कांग्रेस नेताओं की यह सक्रियता बिहार के लोगों पर कितना असर डाल पाएगी।
हालांकि, एक प्रमुख चिंता यह है कि कांग्रेस खुद हरियाणा में पूरी तरह एकजुट नहीं है। राज्य में आंतरिक मतभेद और संगठनात्मक कमजोरी के कारण यह सवाल उठता है कि क्या हरियाणा कांग्रेस की सक्रियता बिहार चुनाव में अपेक्षित प्रभाव डाल पाएगी। यह स्थिति पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
बिहार चुनावों में प्रभाव और रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार चुनाव केवल बिहार की ही नहीं, बल्कि हरियाणा सहित अन्य राज्यों में रहने वाले प्रवासी वोटरों की सक्रियता और समर्थन पर भी निर्भर करेगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां प्रवासी वोटरों को आकर्षित करने के लिए विशेष रणनीति अपना रही हैं।
इस बार की राजनीति में यह देखा जाएगा कि हरियाणा से की गई सक्रियता बिहार के चुनाव परिणामों पर किस हद तक प्रभाव डालती है। इसके साथ ही, गठबंधन और पार्टी नेताओं की स्थानीय छवि और विश्वसनीयता भी निर्णायक भूमिका निभाएगी। कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए यह चुनाव केवल विधानसभा में सीटें जीतने का नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने का भी अवसर है।
















