Boycott: रेवाड़ी जिले में आयोजित की जा रही लोक अदालत का वकीलों ने बहिष्कार कर दिया है। बार एसोसिएशन रेवाड़ी के आह्वान पर अधिवक्ता लोक अदालत के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। इस विरोध में न केवल वकील शामिल हुए, बल्कि उनके मुंशी और लीगल ऐड के अधिवक्ताओं ने भी लोक अदालत में किसी भी पक्ष की पैरवी करने से इनकार कर दिया है।
बार एसोसिएशन के प्रधान विश्वामित्र यादव ने इस विरोध का नेतृत्व करते हुए कहा कि लोक अदालत मूलतः लोगों को राहत देने और विवादों का त्वरित समाधान निकालने के लिए होती है, लेकिन अब इसका उद्देश्य भटक गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब लोक अदालतें आम जनता के बजाय सरकारी हितों के अनुरूप कार्य कर रही हैं।Boycott
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व में जब ट्रैफिक चालान जैसे मामूली मामलों की सुनवाई होती थी, तो अदालतों में 50 से 70 प्रतिशत तक छूट देकर लोगों को राहत दी जाती थी। लेकिन अब पूरी राशि वसूली जा रही है, जिससे आम नागरिकों को कोई फायदा नहीं हो रहा।Bar Association Rewari
पिछली लोक अदालत में भी यही देखा गया कि जनता को उम्मीद के अनुसार राहत नहीं दी गई, बल्कि सरकारी राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से पूरी रकम वसूल की गई। फिर ऐसे लोक अदालत को क्या फायदा। सरकार इससे कम समय में ज्यादा कमाई कर रही है।Bar Association Rewari
बार प्रधान ने स्पष्ट किया कि जब तक लोक अदालतें अपने वास्तविक उद्देश्य — जनहित और न्यायपूर्ण समाधान — की ओर नहीं लौटतीं, तब तक अधिवक्ता इसमें भाग नहीं लेंगे। वकीलों का यह विरोध लगातार जारी रहने की संभावना है, जिससे कई मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
बार एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि लोक अदालतों में जनता को वास्तविक लाभ मिले, अन्यथा यह विरोध और तेज किया जाएगा।Bar Association Rewari

















