Rewari Breaking News: पेरेंट्स पर बच्चों की पढ़ाई का बोझ दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। एक तरफ जहां दाखिले में काफी पैसा देना पड़ता है वहीं दूसरी तरफ निजी स्कूलों की किताबें भी महंगी होती है और हर साल ड्रेस भी बदल जाता है। ड्रेस के नाम पर कमीशन खोरी का नया खेल चल रहा है। जिले के कई निजी स्कूल दो-तीन ते दुकानों से ही ड्रेस खरीदने के लिए कहते हैं।
शहर के मुख्य बाजार में अधिकांश निजी विद्यालय ने दो-तीन दुकान तय की है, जिस पर सुबह से लेकर शाम तक पेरेंट्स की भी ड्रेस खरीदने के लिए देखी जा सकती है। कई अभिभावकों ने बताया कि अब तो बच्चों को अपनी की स्कूलों में पढ़ना बजट से बाहर होता जा रहा है। इन दुकानों से ड्रेस खरीदना हमारी मजबूरी बन गई है।
कई स्कूलों में हर साल बदल जाता है ड्रेस
कई ऐसे स्कूल है जहां हर साल ड्रेस बदल दिया जा रहा है। मजबूरी में पेरेंट्स को बच्चों की नई ड्रेस खरीदनी पड़ती है। कई पैरंट्स ने बताया कि अगर हर साल ड्रेस बदलने पर रोक लगाया जाए तो काफी हद तक हमें आर्थिक रूप से राहत मिलेगी। लेकिन कहीं नहीं जी स्कूल मुनाफाखोरी के चक्कर में पेरेंट्स पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।
वही हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के रामपाल यादव ने कहा कि किताब और स्कूल ड्रेस की उपलब्धता अभिभावकों के लिए काफी सुविधाजनक होना चाहिए। तय दुकान पर ही ड्रेस और किताब का मिलना काफी गलत बात है। उन्होंने सभी स्कूलों से अपील किया कि यह हमारे ही बच्चे हैं और उनके ऊपर आर्थिक बोझ नहीं डाला जाए। वही खंड शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि इसके बारे में जांच की जाएगी और अगर कहीं गलती पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।


















