Breaking News: रेवाड़ी के मसानी बैराज में छोडे जाने वाले काले पानी का मामला तूल पकड गया है।बैराज में भिवाड़ी और बावल औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले पानी को डालने की योजना सामने आने के बाद विरोध शुरू हो गया है। धारूहेडा के लोगो ने कहा है किसी भी कीमत पर साहबी में पानी नही डालने दिया जाएगा। पहले ही इसे दूषित पानी की जोहड बना दिया है वही एक बार फिर इसमें बावल का पानी भी डालने की तैयारी की जा रही है।
पर्यटन केंद्र की आड में बना दीं गंदे पानी की झील: बता दे कि साल 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी। लेकिन सरकार ने जनता के साथ धोखा किया है। साफ पानी की आड में सरेआम काला पानी छेाडा जा रहा है। आलम यहा है आस पास के गांवों का जलस्तर खराब हो चुका है।Breaking News

स्थानीय लोगों और समाजसेवियों का आरोप है कि यदि यह योजना लागू हुई तो आसपास के करीब एक दर्जन गांवों की हजारों एकड़ कृषि भूमि बंजर हो सकती है। वहीं एक बार फिर इससे अब बावल का पानी भी छोडन की तैयारी की जा रही है।
साहबी बचाओ समिति की निकली हवा: एक समय था जब साहबी बचाओ समिति ने इस पानी का काफी विरोध किया था। काला पानी का कहर बढता जा रहा है लेकिन साहबी बचाओ सघंर्ष समिति की अब हवा निकल चुकी है। यानि कोई भी इसको लेकर विरोध नहीं कर रहा है। ऐसा क्यो क्या ये समस्या लोगो की नही है तो इसका विरोध नहीं किया जा रहा है।
पर्यावरण विभाग को भेजा पत्र: सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव ने इस प्रस्ताव के खिलाफ सरकार और पर्यावरण विभाग को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि साहबी नदी से जुड़े मसानी बैराज में औद्योगिक क्षेत्रों का दूषित पानी डालने की तैयारी की जा रही है, जिसे बरसाती पानी की निकासी का नाम दिया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे क्षेत्र में भारी पर्यावरणीय नुकसान होगा और किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।Breaking News

बता दे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मसानी बैराज का निरीक्षण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। योजना के तहत बैराज का जीर्णोद्धार कर यमुना के सरप्लस पानी से झील को भरने और शहरी क्षेत्रों के ट्रीट किए गए पानी को उपयोग में लाने की बात कही गई थी, ताकि जलस्तर बढ़े और खारा पानी मीठा हो सके। हालांकि उस समय भी दूषित पानी को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं।
पानी डालने की तैयारी: बता दे कि अब सिंचाई विभाग द्वारा “एचएसआईआईडीसी आईएमटी बावल से साहबी नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बरसाती जल निकासी” के नाम पर लगभग 6332.54 लाख रुपये की परियोजना प्रस्तावित की गई है, जिसे 400 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत आईएमटी बावल का पानी सीधे साहबी बैराज मसानी में डालने की तैयारी बताई जा रही है।
बता दे पहले ही इस योजना से खरखड़ा, खलियावास, निखरी, भटसाना, कतारपुर खालसा, मसानी, रोजका, जीतपुरा, खटावली, डूंगरवास और रसगन सहित कई गांवों की कृषि भूमि बंजर हो चुकी। साहबी नदी का क्षेत्र करीब 500 एकड़ में फैला है, जहां पहले से ही दूषित पानी जमा है। यदि इसमें औद्योगिक अपशिष्ट और मिला तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी।
उन्होंने मांग की है कि आईएमटी बावल और भिवाड़ी सहित किसी भी औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित पानी प्राकृतिक जल स्रोतों में डालने पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में प्रभावी ईटीपी और एसटीपी लगाकर गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाए, ताकि पर्यावरण और किसानों की जमीन को बचाया जा सके।
प्रस्ताव के खिलाफ सरकार और पर्यावरण विभाग को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि साहबी नदी से जुड़े मसानी बैराज में औद्योगिक क्षेत्रों का दूषित पानी नहीं डाला जाए। क्योकि इससे क्षेत्र में भारी पर्यावरणीय नुकसान होगा और किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
प्रकाश यादव खरखडा

















