Breaking News: जब भी भारत के मध्यम वर्ग (Middle Class) के लिए एक भरोसेमंद और किफायती दोपहिया वाहन खरीदने की बात आती है, तो जुबां पर सबसे पहला नाम ‘हीरो’ (Hero) का आता है। आज देश के हर दूसरे घर के आंगन में खड़ी स्प्लेंडर या पैशन बाइक महज एक गाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों का भरोसा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के इस सबसे बड़े टू-व्हीलर साम्राज्य को खड़ा करने वाला शख्स कभी बंटवारे के दंश में अपना सब कुछ खोकर खाली हाथ भारत आया था?
जी हां, हम बात कर रहे हैं हीरो मोटोकॉर्प के संस्थापक स्वर्गीय बृजमोहन लाल मुंजाल जी की, जिनकी 1 जुलाई को 103वीं जयंती है। आइए जानते हैं फर्श से अर्श तक पहुंचने की उनकी वो जादुई कहानी, जो हर किसी में जोश भर देगी। Breaking News

विभाजन का दंश: कमालिया से अमृतसर और फिर लुधियाना का सफर
बृजमोहन लाल मुंजाल का जन्म 1 जुलाई 1923 को अविभाजित भारत (वर्तमान पाकिस्तान) के पंजाब प्रांत के जिला टोबा टेक सिंह के कमालिया में हुआ था। करीब 75 साल पहले जब देश का बंटवारा हुआ, तो मुंजाल अपने तीन भाइयों के साथ सबकुछ छोड़कर भारत के अमृतसर आ गए। शुरुआत में उन्होंने साइकिल के छोटे-मोटे स्पेयर पार्ट्स बेचने का काम शुरू किया, लेकिन विभाजन के बाद भड़के दंगों के कारण उन्हें अमृतसर भी छोड़ना पड़ा और वे लुधियाना में शिफ्ट हो गए। यही वो मोड़ था जिसने इतिहास बदलने की नींव रखी।
पाकिस्तान के बटवारे के बाद Hero Group बृजमोहन लाल मुंजाल और उनके तीन भाइयों (दयानंद, सतानंद, और ओम प्रकाश) ने लुधियाना में आकर साइकिल के पार्ट्स बेचने की शुरुआत की 1956 में उन्होंने Hero Cycles की स्थापना की, जो बाद में तरक्की करके दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी—Hero MotoCorp और Hero Cycles बनी
एक छोटे से लाइसेंस ने बदली किस्मत, बना दिया ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’
लुधियाना आकर बृजमोहन लाल ने अपने भाई ओम प्रकाश मुंजाल के साथ मिलकर ‘हीरो साइकिल्स’ की स्थापना की। संघर्ष के दिनों के बीच उन्हें पंजाब सरकार से साइकिल बनाने का सरकारी लाइसेंस मिल गया, जिसके बाद मुंजाल भाइयों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी साइकिलों की क्वालिटी और मजबूती ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि 1975 तक हीरो देश की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी बन गई।

कामयाबी का सिलसिला यहीं नहीं रुका, साल 1986 में इस कंपनी ने दुनिया में सबसे अधिक साइकिल बनाने का ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ अपने नाम कर भारत का डंका पूरी दुनिया में बजा दिया। सबसे अहम बात यह है आज भी हीरो मोटो कोर्प विश्व में नंबर है। होडा व बजाज ने मार्केट में फेल करने के लिए खूब प्रयास किया लेकिन हीरो की हीरो गिरी आज भी जिंदा है। 1986 में कंपनी इतनी तेजी से बढ़ी कि 18,500 से ज्यादा साइकिलें रोजाना बनाकर Hero Cycles Ltd.ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया था।
आज यह समूह The Hero Group Companies in India – BML Munjal University के तहत विभिन्न सेक्टरों में सक्रिय है और Firefox Bikes जैसी कंपनियों का अधिग्रहण कर विश्व स्तर पर ई-साइकिल (e-bikes) और ऑटोमोटिव पार्ट्स का भी कारोबार कर रहा है। Breaking News
डीलर्स को नाम से जानते थे मुंजाल, व्यवहार ही था सफलता का सबसे बड़ा राज
व्यापार जगत में कहा जाता है कि बृजमोहन लाल मुंजाल की सफलता का सबसे बड़ा राज उनका अद्भुत और सरल व्यवहार था। वे कॉर्पोरेट कल्चर से दूर, एक परिवार की तरह बिजनेस चलाते थे। कहा जाता है कि वे अपने देश भर के हजारों डीलर्स और सप्लायर्स को उनके नाम से पहचानते थे। उनके सुख-दुख में खड़े होना और किसी का भी भुगतान (Payment) कभी देरी से न करना उनकी सबसे बड़ी खासियत थी। इसी ईमानदारी और भरोसे के दम पर उनका बिजनेस बढ़ता चला गया।
जापानी कंपनी ‘होंडा’ से मिलाया हाथ और भारतीय सड़कों पर ला दी क्रांति
80 के दशक में मुंजाल जी ने भाप लिया था कि अब देश का रुझान साइकिल से हटकर पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने पहले मोपेड बनाने वाली कंपनी ‘हीरो मैजेस्टिक’ शुरू की, लेकिन असली क्रांति आई साल 1984 में, जब उन्होंने जापानी दिग्गज कंपनी ‘होंडा मोटर्स’ के साथ साझेदारी की।
1985: कंपनी ने अपनी पहली आइकॉनिक बाइक ‘हीरो होंडा CD100′ लॉन्च की, जो देखते ही देखते सुपरहिट हो गई।

1994: कंपनी ने भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास की सबसे सफल बाइक ‘हीरो होंडा स्प्लेंडर’ लॉन्च की, जिसने हीरो को दुनिया की अग्रणी दोपहिया वाहन कंपनी के सिंहासन पर बैठा दिया।
2010 में छोडा होडा का साथ: बताया जा रहा है जब होंडा ने मानेसर में अपना अलग मोटरसाइकिल प्लांट लगाया तो हीरो ओर होंडा अलग हो गए। 2010 से बजाज व होंडा हीरो को पछाडने मे जी जान से लगे हुए है लेकिन 15 साल बाद ही हीरो ने हार ही मानी। कुछ लोग यह भी कहते थे अब होंडा हट गई है हीरो के पास कुछ नहीं है वह हिंदुस्तान में जल्द ही कंपनी बंद हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हीरो ने अपनी अलग से आरएनडी तैयार की ओर अपना दबदबा बरकरार रखा।
87 साल की उम्र में झेला पार्टनरशिप टूटने का दर्द, पर नहीं मानी हार
26 सालों तक भारतीय सड़कों पर राज करने के बाद, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कुछ आंतरिक कारणों के चलते ‘हीरो’ और ‘होंडा’ की राहें अलग हो गईं। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंजाल जी दिल से नहीं चाहते थे कि यह ऐतिहासिक साझेदारी टूटे, लेकिन जब ऐसा हुआ तब उनकी उम्र 87 वर्ष थी। इस उम्र में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और हर टॉप मैनेजमेंट मीटिंग में खुद शामिल होकर ‘हीरो मोटोकॉर्प’ (Hero MotoCorp) के नए युग की शुरुआत की।
साल 2015 के मध्य में उन्होंने अपने बेटे पवन मुंजाल को इस विशाल साम्राज्य की कमान सौंपी और 1 नवंबर 2015 को 92 वर्ष की उम्र में इस महानायक ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
यादगार में आज भी लगता है मेगा रक्तदान शिविर

डॉ. बृजमोहन लाल मुंजाल की यादों और उनके सेवा भाव को जिंदा रखते हुए आज भी उनकी जयंती के अवसर पर हीरो मोटोकॉर्प के देश भर में मौजूद हर प्लांट में एक विशाल (Mega) रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। सबसे खास बात यह है कि मुंजाल जी की प्रेरणा के चलते हर साल इस शिविर में खून दान करने वाले रक्तदाताओं की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार से बढ़ती जा रही है, जो इस महान उद्योगपति को सच्ची श्रद्धांजलि है।














