दुनियाभर में इस समय आर्थिक और राजनीतिक हालात काफी अस्थिर बने हुए हैं। कई देशों के बीच तनाव की स्थिति है, वहीं शेयर बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। आमतौर पर जब भी वैश्विक स्तर पर इस तरह का संकट आता है, निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए Gold की तरफ रुख करते हैं। यही कारण है कि सोने को “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता है। लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग दिखाई दे रही है। मौजूदा हालात में जहां सोने की कीमतें बढ़नी चाहिए थीं, वहीं इसके दाम लगातार नीचे आ रहे हैं। यह गिरावट निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए भी हैरानी का कारण बन गई है।
शेयर बाजार में नुकसान की भरपाई के लिए बिक रहा सोना
Gold की कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह शेयर बाजार में आई भारी गिरावट को माना जा रहा है। पिछले कुछ समय में दुनियाभर के कई बड़े शेयर बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जब निवेशकों को शेयर बाजार में घाटा होता है, तो वे अपने दूसरे निवेश साधनों से पैसा निकालकर नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करते हैं।
इसी वजह से बड़ी संख्या में निवेशक अपने पास जमा सोने को बेच रहे हैं। इस प्रक्रिया को बाजार की भाषा में “प्रॉफिट बुकिंग” या “लिक्विडिटी बनाने” की रणनीति कहा जाता है। जब बड़ी मात्रा में सोना बाजार में बिकने लगता है, तो उसकी सप्लाई बढ़ जाती है और कीमतों पर दबाव बनता है। मांग कम होने और सप्लाई बढ़ने के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आ जाती है। यही वजह है कि इस समय संकट के बावजूद सोना अपेक्षित तेजी नहीं दिखा पा रहा है।
केवल 12 दिनों में भारी गिरावट ?
अगर हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट काफी बड़ी है। मार्च की शुरुआत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत लगभग 1.70 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई थी। लेकिन इसके बाद बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिली।
सिर्फ 12 दिनों के भीतर सोने की कीमत में करीब 12 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार तक सोना गिरकर लगभग 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। चांदी के दाम में भी तेज गिरावट देखने को मिली है। 2 मार्च को चांदी की कीमत करीब 2.97 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो अब घटकर लगभग 2.54 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास आ गई है। यानी महज 12 दिनों में चांदी में निवेश करने वालों को प्रति किलो करीब 43 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर ?
भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती हैं। जब वैश्विक बाजार में इन धातुओं के दाम गिरते हैं, तो इसका असर भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई देता है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
कॉमेक्स जैसे वैश्विक कमोडिटी बाजारों में शुक्रवार को सोना और चांदी दोनों ही कमजोर होकर बंद हुए। कई ट्रेडिंग सत्रों में इनकी कीमतों में 1 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर की मजबूती और निवेशकों की बदलती रणनीति भी इसकी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। निवेशक घबराहट में फैसले ले रहे हैं, जिसे बाजार की भाषा में “पैनिक सेलिंग” कहा जाता है। ऐसे माहौल में निवेशक सबसे पहले नकदी को प्राथमिकता देते हैं ताकि किसी भी संभावित संकट का सामना किया जा सके।
हालांकि लंबे समय के नजरिए से देखा जाए तो सोना अब भी सुरक्षित निवेश का एक मजबूत विकल्प माना जाता है। इतिहास गवाह है कि आर्थिक संकट के दौर में अंततः सोने की कीमतें फिर से संभल जाती हैं और कई बार नई ऊंचाइयों तक पहुंच जाती हैं। इसलिए कई बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा गिरावट अस्थायी हो सकती है।
आने वाले समय में यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है, शेयर बाजार में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो सोने की कीमतों में भी फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजरें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई हैं, जो तय करेंगे कि आने वाले दिनों में सोना फिर चमकेगा या गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा।

















