Railways News: ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए रेलवे का बड़ा कदम, जानिए कैसे देगें कोहरो को मात

On: November 23, 2025 11:30 AM
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Fog Safe Device

Railways News: ठंड के मौसम में कोहरे के कारण ट्रेनों का लेट होना आम बात है। कुछ ट्रेन तो कोहरे की वजह से 8 से 10 घंटे की देरी से स्टेशन पर पहुंचती हैं। लेकिन अब रेल मंडल कोहरे के कारण इन ट्रेनों से समझौता नहीं करने वाला है। इसीलिए इन ट्रेनों में अब फाग सेफ डिवाइस (Fog Safe Device)(FSD) का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिम्मेदारी के चलते अब रूट वाईट उिवाइस दिए जा रहे है।

सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले कोहरे को देखते हुए रेलवे ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेवाड़ी–अलवर व नारनौल रूट पर 1500 से अधिक फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाने का निर्णय लिया है। इन आधुनिक उपकरणों को सभी लोकोमोटिव इंजनों पर स्थापित किया जाएगा, जिससे घने कोहरे के दौरान ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारू तरीके से किया जा सके। क्योकि अब धीरे धीरे कोहरा बढते लगा है ऐसे में ये सुविधा ट्रेनो के सुरक्षा कवच का काम करेंगे।Railways News

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह डिवाइस कम दृश्यता की स्थिति में सिग्नलों और पाथ जानकारी को लोको पायलट तक पहुंच पाएंगी, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना में काफी कमी आएगी। क्योंकि वर्ष सर्दियों में फॉग की वजह से रेवाड़ी-अलवर सेक्शन सहित कई रूटों पर ट्रेनें देरी से चलती हैं और कई बार लोको पायलटों को सिग्नल पहचानने में दिक्कतें आती हैं। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड ने सभी डिवीजनों को पहले चरण में अत्यधिक फॉग प्रभावित रूटों पर फॉग डिवाइस इंस्टॉल करने के निर्देश जारी किए हैं।

इस रूट लगेगी इतनी डिवाईस: रेवाड़ी-अलवर रूट को भी इस सूची में शामिल किया गया है, जहां करीब 1500 डिवाइस लगाए जाएंगे।रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फॉग डिवाइस लगने से न केवल ट्रेनों की गति और समय निर्धारण में सुधार आएगा, बल्कि पायलटों को भी अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध होगी। आने वाले दिनों में डिवाइस की इंस्टॉलेशन प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि दिसंबर से फरवरी तक चलने वाले फॉग सीजन में इसका पूरा लाभ मिल सके। रेलवे ने उम्मीद जताई है कि इस कदम से यात्रियों की सुरक्षा और समयबद्ध यात्रा दोनों सुनिश्चित होंगी।

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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