Haryana: हाईकोर्ट का फैसला बदल सकता है सब-इंस्पेक्टर की Confirmation की तारीख, जानें क्या है सच्चाई!

On: November 22, 2025 6:05 PM
Follow Us:
court

Haryana: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पेक्टरों की कन्फर्मेशन डेट को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने यह स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस रूल 13.18 के तहत यदि किसी अधिकारी की प्रोबेशन अवधि पूरी हो गई है और न तो उसकी प्रोबेशन अवधि बढ़ाई गई है और न ही उसे मूल पद पर वापस किया गया है, तो वह अधिकारी स्वचालित रूप से “डीड कन्फर्म्ड” माना जाएगा। यह फैसला नरेश कुमार और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

इस मामले में गुरुग्राम रेंज के पांच सब-इंस्पेक्टर शामिल थे, जिन्हें 2001 में ASI से SI के पद पर प्रोन्नत किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनकी दो साल की प्रोबेशन अवधि अगस्त 2003 में पूरी हो गई थी, लेकिन उन्हें अगस्त 2006 में ही कन्फर्म किया गया, जब स्थायी पद उपलब्ध हुए। इस विलंब का असर उनकी सिनियरिटी और भविष्य की प्रोन्नति, विशेषकर इंस्पेक्टर और DSP के पदों पर पड़ा। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि अंबाला रेंज के उनके बैचमेट्स, जिनकी प्रोन्नति उनके बाद हुई, उन्हें 2004 में ही कन्फर्म कर दिया गया, जबकि परिस्थितियां समान थीं।

राज्य सरकार का तर्क था कि उस समय गुरुग्राम रेंज में केवल अस्थायी पद उपलब्ध थे, इसलिए स्थायी पद मिलने तक कन्फर्मेशन नहीं दिया जा सकता। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पंजाब पुलिस रूल 13.18 में कन्फर्मेशन को स्थायी पद की उपलब्धता से जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है। नियमों के अनुसार प्रोबेशन की अधिकतम अवधि तीन वर्ष है, और यदि इस अवधि में कोई विस्तार या रिवर्शन नहीं होता, तो अधिकारी स्वतः ही कन्फर्म माना जाएगा।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब नियम किसी अतिरिक्त शर्त, परीक्षा या संतुष्टि प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं करते, तो केवल औपचारिक आदेशों में देरी अधिकारी के अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी कहा कि विभिन्न रेंजों में अलग-अलग कन्फर्मेशन सिस्टम से समान परिस्थितियों में अधिकारियों के बीच भेदभाव उत्पन्न होता है, जो अस्वीकार्य है।

पुष्टि की तारीख और वरिष्ठता लाभ को मान्यता

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की कन्फर्मेशन डेट को उनकी प्रोबेशन अवधि पूरी होने की तारीख से प्रभावी माना जाए। इसके साथ ही सभी वरिष्ठता और वित्तीय-पदोन्नति लाभ भी तीन महीने के भीतर प्रदान किए जाएं। यह निर्णय हरियाणा पुलिस के उन अधिकारियों के लिए राहत की खबर है, जिनकी कन्फर्मेशन लंबे समय तक स्थायी पद की प्रतीक्षा में रोक दी गई थी।

इस फैसले से न केवल अधिकारियों की पेशेवर जिम्मेदारियों और अधिकारों में स्पष्टता आएगी, बल्कि भविष्य में समान परिस्थितियों में सभी अधिकारियों के साथ न्याय सुनिश्चित होगा। अदालत का यह निर्णय नीति निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रिया में समानता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों और प्रशासन पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से पुलिस विभाग में सिनियरिटी और प्रमोशन से जुड़ी विवादित स्थितियों का समाधान होगा। अधिकारियों को अब अपने अधिकारों और पदोन्नति में न्याय मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह फैसला यह संदेश देता है कि नियमों के पालन में विलंब या भेदभाव किसी भी अधिकारी के अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकता।

राज्य सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि तीन महीने के भीतर अदालत के निर्देशों का पालन किया जाए। इस फैसले से हरियाणा पुलिस में लंबे समय से चले आ रहे कन्फर्मेशन विवादों का स्थायी समाधान मिलने की संभावना बढ़ गई है।

Best24News

सुनील कुमार पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 8 साल से सक्रिय है। इन्होंने दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरीभूमि व अमर उजाला में बतौर संवाददाता काम किया है। अब बेस्ट 24 न्यूम में बतौर फाउंडर कार्यरत हूं

Join WhatsApp

Join Now

google-newsGoogle News

Follow Now