हरियाणा सरकार ने प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के अपने अभियान को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य की 15 जेलों में नशा मुक्ति केंद्र खोलने की तैयारी पूरी कर ली गई है, जहां प्रत्येक केंद्र में 15 बेड की व्यवस्था होगी और ओपीडी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। जेल विभाग द्वारा इन केंद्रों के लिए मनोचिकित्सक सहित आवश्यक स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इस योजना की नींव पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में रखी गई थी, जब उन्होंने सभी जेलों में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने की स्वीकृति दी थी। अब मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में सरकार इस दिशा में आगे बढ़ते हुए इन केंद्रों को धरातल पर उतारने जा रही है। शुरुआत में हिसार, रोहतक, अंबाला जैसी प्रमुख जेलों में यह सुविधा प्राथमिकता के आधार पर शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य जेलों में बंद नशाग्रस्त कैदियों को बाहर ले जाने की आवश्यकता को खत्म कर, उन्हें वहीं पर इलाज की सुविधा देना है।
वर्तमान में हरियाणा में 130 नशा मुक्ति केंद्र पहले से संचालित हैं। अब सरकार 46 और केंद्र खोलने की योजना पर काम कर रही है। इनमें से 12 जिला अस्पतालों और 34 उपमंडल अस्पतालों में यह सुविधा विकसित की जाएगी।
यहां खुलेंगे नए केंद्र:
जिला अस्पतालों में:
भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद, झज्जर, जींद, पलवल, पानीपत, नूंह, रेवाड़ी, रोहतक, सोनीपत और यमुनानगर।
उपमंडल स्तर पर:
अंबाला कैंट, नारायणगढ़, लोहारू, बवानीखेड़ा, तोशाम, सिवानी, टोहाना, रतिया, बल्लभगढ़, पटौदी, सोहना, हांसी, आदमपुर, नारनौंद, बरवाला, नीलोखेड़ी, असंध, इंद्री, समालखा, शाहाबाद, गोहाना, कलायत, गुहला, नरवाना, सफीदों, जगाधरी, महम, डबवाली, ऐलनाबाद, कालका, बहादुरगढ़, बेरी, कोसली और महेंद्रगढ़।
सरकार की यह पहल नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई को और गति देगी। इससे न केवल जेलों में बंद कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी, बल्कि समाज में पुनर्वास की दिशा में भी यह एक सराहनीय प्रयास साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राज्य में नशे की समस्या को नियंत्रित करने में मील का पत्थर बन सकती है।
















