RBI Note Recycling: पुराने कटे फटे नोट का क्या करता है RBI ? यहां जानिए पूरी डिटेल

On: May 30, 2025 5:57 PM
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RBI Note Recycling: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब कटे-फटे कागजी नोटों के निपटान को और अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए RBI ने एक नई योजना के तहत पुराने नोटों का इस्तेमाल लकड़ी के बोर्ड (पार्टिकल बोर्ड) बनाने में करने की प्रक्रिया शुरू की है. इस काम के लिए ऐसे निर्माताओं को पैनल में शामिल किया जाएगा, जो इस प्रकार के बोर्ड तैयार करते हैं.

हर साल 15,000 टन खराब नोट हो रहे हैं बेकार
RBI की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगभग 15,000 टन कटे-फटे नोटों या ब्रिकेट (note fragments से बने ब्लॉक) का उत्पादन होता है. इनका अब तक जमीन में भराव या जलाने के रूप में निपटान होता था. जो पर्यावरण के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. अब RBI हरित विकल्पों (Green Solutions) की ओर बढ़ रहा है.

नोट छपाई का खर्च 25% बढ़कर पहुंचा 6,372 करोड़
साल 2024-25 में बैंक नोट छापने पर खर्च करीब 25 प्रतिशत बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष 5,101.4 करोड़ रुपये था. इस दौरान देश में प्रचलन में मौजूद नोटों की संख्या और मूल्य क्रमश: 5.6% और 6% बढ़े हैं. 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी अब भी सबसे अधिक है, जो मूल्य के अनुसार 86 प्रतिशत है. हालांकि इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई है.

देश की युवा पीढ़ी तेजी से अपना रही है UPI
भारत की 15-29 वर्ष की आयु के अधिकांश युवा अब डिजिटल बैंकिंग की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं. सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी ‘व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण: दूरसंचार-2025’ के अनुसार इस आयु वर्ग के लगभग 99.5% युवा अब UPI के जरिए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने में सक्षम हैं.

सर्वे में यह भी सामने आया कि:

97.1% युवा पिछले 3 महीनों में मोबाइल फोन का उपयोग कर चुके हैं.
ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 96.8% और शहरी इलाकों में 97.6% है.
ग्रामीण क्षेत्रों में 95.5% युवाओं के पास स्मार्टफोन है. जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 97.6% तक पहुंच गया है.
यह दर्शाता है कि डिजिटल पहुंच तेजी से गांवों तक फैल रही है.

तेजी से बढ़ा ई-रुपये का उपयोग
देश में डिजिटल करेंसी (CBDC या ई-रुपया) का उपयोग भी अब रफ्तार पकड़ चुका है. RBI की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक ई-रुपया का मूल्य बढ़कर 1,016 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल मात्र 234 करोड़ रुपये था.

इसके अलावा, सीमापार भुगतान (cross-border payments) में CBDC के उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. हालांकि RBI ने इसकी कोई समयसीमा घोषित नहीं की है.

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सुनील कुमार पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 8 साल से सक्रिय है। इन्होंने दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरीभूमि व अमर उजाला में बतौर संवाददाता काम किया है। अब बेस्ट 24 न्यूम में बतौर फाउंडर कार्यरत हूं

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