Rent Agreement Rule: Rent Agreement आखिर 11 महीने का ही क्यों होता है? जानिए क्या है वजह

On: May 17, 2025 1:31 PM
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Rent Agreement

Rent Agreement: भारत में हर साल लाखों लोग नौकरी, शिक्षा या व्यवसाय के लिए दूसरे शहरों में शिफ्ट होते हैं और किराए पर मकान लेते हैं. ऐसे में मकान मालिक और किरायेदार दोनों के बीच स्पष्टता बनाए रखने के लिए रेंट एग्रीमेंट (किराया समझौता) एक आवश्यक दस्तावेज बन जाता है. यह न केवल अधिकारों और कर्तव्यों को स्पष्ट करता है. बल्कि कानूनी सुरक्षा भी प्रदान करता है.

क्यों होता है रेंट एग्रीमेंट सिर्फ 11 महीने का?

अधिकतर मामलों में रेंट एग्रीमेंट हमेशा 11 महीनों के लिए ही क्यों बनता है, इसका जवाब भारत के रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 में छिपा है. इस कानून के मुताबिक अगर कोई किराया समझौता 12 महीने या उससे अधिक समय के लिए होता है, तो उसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है. इसमें स्टांप ड्यूटी और कानूनी औपचारिकताओं का अतिरिक्त खर्च जुड़ जाता है.

इसी खर्च और झंझट से बचने के लिए अधिकतर लोग 11 महीने का ही एग्रीमेंट बनाते हैं, जिसे बाद में नई शर्तों के साथ दोबारा नवीनीकृत किया जा सकता है.

रेंट एग्रीमेंट के कानूनी फायदे
एक मान्य रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किरायेदार दोनों के लिए फायदेमंद होता है. इसमें निम्नलिखित बातें स्पष्ट रूप से दर्ज होती हैं:

मासिक किराया और भुगतान की तारीख
बिजली-पानी जैसे यूटिलिटी खर्चों की जिम्मेदारी
मकान की मरम्मत से संबंधित शर्तें
रहने की अवधि और नोटिस पीरियड
यह दस्तावेज किसी भी विवाद की स्थिति में कानूनी आधार बनता है.

रेंट एग्रीमेंट बनवाते समय रखें इन बातों का ध्यान
सिक्योरिटी डिपॉजिट का उल्लेख:
डिपॉजिट की राशि, वापसी की शर्तें और कटौती की स्थिति एग्रीमेंट में साफ होनी चाहिए.

किराया और शुल्क का स्पष्ट उल्लेख करें:
किराए की राशि, मेंटेनेंस शुल्क, भुगतान की तारीख और पेनल्टी की जानकारी एग्रीमेंट में साफ-साफ होनी चाहिए.

किराया बढ़ाने की शर्तें तय हों:
मकान मालिक कब और कितना किराया बढ़ा सकता है. यह नियम एग्रीमेंट में पहले से लिखवाना जरूरी है.

नोटिस पीरियड तय करें:
यदि कोई भी पक्ष मकान छोड़ना या खाली कराना चाहता है, तो 30 दिन का नोटिस पीरियड एग्रीमेंट में जरूर शामिल करें.

लॉक-इन पीरियड का उल्लेख:
यदि लॉक-इन पीरियड है, तो उस दौरान किरायेदार न तो मकान छोड़ सकता है, न ही मालिक उसे निकाल सकता है.

गैरवाजिब शर्तों से बचें:
जैसे पालतू जानवर रखने पर रोक, शाकाहारी होने की शर्त आदि. ऐसी शर्तें एग्रीमेंट में न हों, यह सुनिश्चित करें.

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सुनील कुमार पत्रकारिता क्षेत्र में पिछले 8 साल से सक्रिय है। इन्होंने दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, हरीभूमि व अमर उजाला में बतौर संवाददाता काम किया है। अब बेस्ट 24 न्यूम में बतौर फाउंडर कार्यरत हूं

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