पानीपत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा-2026 की तीन दिवसीय बैठक को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। यह बैठक न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि इसमें हरियाणवी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं की विशेष झलक भी देखने को मिलेगी। बैठक स्थल पर एक विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर, लोकजीवन और पारंपरिक मूल्यों को दर्शाया जाएगा। इसके साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित गतिविधियों और कार्यक्रमों को भी प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इस आयोजन के जरिए देशभर से आने वाले प्रतिनिधियों को संघ के कार्यों, विचारों और समाज में उसके योगदान की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
आरएसएस की यह वार्षिक बैठक संगठन के लिए बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि इसमें पूरे वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ आने वाले समय की रणनीति भी तय की जाती है। बैठक के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देने का काम बुधवार तक पूरा कर लिया जाएगा। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर बुधवार दोपहर 12 बजे प्रेस को संबोधित करते हुए इस पूरे कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा करेंगे। इसमें बैठक के एजेंडे, विभिन्न सत्रों की जानकारी और प्रदर्शनी से जुड़ी खास बातें बताई जाएंगी। इस बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो संगठन के कार्यों और समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
हरियाणवी संस्कृति की विशेष प्रदर्शनी ?
इस बैठक की खास बात यह है कि आयोजन स्थल पर हरियाणवी संस्कृति और सभ्यता को प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष प्रदर्शनी लगाई जा रही है। इस प्रदर्शनी में हरियाणा की लोक परंपराएं, ग्रामीण जीवनशैली, पारंपरिक पहनावा, लोक कला और ऐतिहासिक विरासत को चित्रों, मॉडल और अन्य माध्यमों के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य देशभर से आने वाले प्रतिनिधियों को हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराना है। हरियाणा की लोक संस्कृति में वीरता, परिश्रम और सामाजिक एकता का संदेश मिलता है, जिसे इस प्रदर्शनी के माध्यम से प्रभावी तरीके से दिखाया जाएगा। आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे प्रतिनिधियों को स्थानीय संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिलेगा और राज्य की पहचान भी मजबूत होगी।
शताब्दी वर्ष की गतिविधियों का प्रदर्शन ?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस समय अपने शताब्दी वर्ष का उत्सव मना रहा है। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गई हैं। बैठक स्थल पर लगाई जाने वाली दूसरी प्रदर्शनी में इन्हीं कार्यक्रमों और गतिविधियों को दर्शाया जाएगा। इसमें विजयादशमी उत्सव, गृह संपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन, युवा सम्मेलन, प्रमुख नागरिक गोष्ठी और सामाजिक सद्भाव बैठकों की झलक दिखाई जाएगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से संघ ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का प्रयास किया है। प्रदर्शनी में बड़े आयोजनों की तस्वीरें, जानकारी और उनके प्रभाव को भी प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे प्रतिनिधियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि शताब्दी वर्ष के दौरान संगठन ने किस तरह समाज के बीच सक्रिय भूमिका निभाई।
समाज में एकजुटता पर जोर ?
आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को बैठक की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए विभिन्न क्षेत्रों की बैठकों में भाग लिया और शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यों की रिपोर्ट भी ली। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यकर्ताओं ने इस दौरान समाज के बीच जाकर लोगों से सीधे संपर्क स्थापित किया और राष्ट्र की एकता व सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए काम किया। उन्होंने बताया कि विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने का प्रयास किया गया, जिससे सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। लोगों में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय भावना को लेकर जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे इसी तरह समाज के बीच सक्रिय रहकर सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते रहें।
पानीपत में होने वाली यह तीन दिवसीय बैठक संगठनात्मक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण फैसलों की दिशा तय कर सकती है। इसमें न केवल संघ के आगामी कार्यक्रमों और रणनीतियों पर चर्चा होगी, बल्कि समाज के विभिन्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। हरियाणवी संस्कृति की झलक और शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की प्रदर्शनी इस बैठक को और भी खास बनाएगी। इससे देशभर से आए प्रतिनिधियों को संगठन की विचारधारा, कार्यप्रणाली और सामाजिक योगदान को समझने का बेहतर अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, यह बैठक संघ के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है, जो आने वाले समय में संगठन की दिशा और कार्यशैली को प्रभावित करेगी।

















