हरियाणा के Chhainsa गांव में हैपेटाइटिस से मौतों का सिलसिला, स्वास्थ्य विभाग सतर्क

On: March 10, 2026 10:56 AM
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Hepatitis Outbreak in Chhainsa Village Raises Health Concerns

Haryana News के हथीन उपमंडल के Chhainsa गांव में पिछले डेढ़ महीने से हैपेटाइटिस की बीमारी ने हड़कंप मचा रखा है। स्थानीय निवासियों और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस अवधि में करीब 20 लोग इस घातक संक्रमण के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। गांव में मौतों का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे ग्रामीणों में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।

Hepatitis Outbreak in Chhainsa Village Raises Health Concernsस्वास्थ्य विभाग ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बीमारी की जड़ तक पहुँचने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। हाल ही में हैपेटाइटिस से प्रभावित एक 35 वर्षीय महिला का शव नूंह मेडिकल कालेज में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। यह प्रयास यह समझने के लिए किया गया कि मौत का वास्तविक कारण हैपेटाइटिस ही है या कोई अन्य रोग भी इसमें योगदान दे रहा है। डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि गांव में करीब दो हजार लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इन सैंपलों की जांच से पता चला कि लगभग 50 लोग वर्तमान में बीमार हैं। उन्होंने आगे कहा कि हैपेटाइटिस की बीमारी का असर आमतौर पर संक्रमण के 10 से 15 दिन बाद दिखाई देता है। इस कारण शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी और फैलने की संभावना बढ़ जाती है।

Hepatitis Outbreak in Chhainsa Village Raises Health Concernsगांव में संक्रमण के व्यापक स्तर पर फैलने के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी जांच और निगरानी के लिए गांव का दौरा कर चुकी हैं। इन टीमों ने ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाते हुए उन्हें संक्रमण से बचाव और साफ-सफाई के महत्व के बारे में जानकारी दी। साथ ही, जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम पिछले एक महीने से लगातार घर-घर जाकर जांच और वैक्सीनेशन कर रही है। इन कैंपों का मुख्य उद्देश्य हैपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित लोगों को समय पर वैक्सीन उपलब्ध कराना और संक्रमण को फैलने से रोकना है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि किसी को बुखार, पेट दर्द, पेशाब में बदलाव, आंखों का पीला पड़ना या उल्टी जैसी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या कैंप में संपर्क करें

हैपेटाइटिस की जानकारी प्रकार और स्वास्थ्य जोखिम

हैपेटाइटिस, जिसे आम भाषा में “जॉन्डिस” भी कहा जाता है, एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से यकृत (लीवर) को प्रभावित करता है। इस रोग के कई प्रकार हैं, जिनमें सबसे सामान्य हैं: हैपेटाइटिस A, B, C, D और E। इनमें से हैपेटाइटिस B और C खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि ये लंबे समय तक यकृत को प्रभावित कर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि इस बीमारी का फैलाव अक्सर असुरक्षित पानी, गंदगी और स्वच्छता की कमी के कारण होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यदि पानी की आपूर्ति और स्वच्छता पर ध्यान न दिया जाए तो बीमारी तेजी से फैल सकती है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। गांव में पानी की जांच की जा रही है और संक्रमित क्षेत्रों में वाटर प्यूरीफिकेशन के उपाय किए गए हैं। इसके साथ ही, लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने और खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित रखने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।

गांववासियों में भय और चिंता के बावजूद, स्वास्थ्य विभाग की निरंतर निगरानी और वैक्सीनेशन कैंपों ने कई लोगों को संक्रमण से बचाने में मदद की है। विभाग ने गांव में विशेष स्वास्थ्य शिविरों की स्थापना की है, जहां लोगों को मुफ्त जांच और वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हैपेटाइटिस का प्रभावी इलाज और संक्रमण की रोकथाम दोनों ही समय पर कार्रवाई पर निर्भर करते हैं। जल्दी पहचान और उचित उपचार से गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है। इसके लिए लोगों को संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गांव की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और समय पर जागरूकता फैलाना कितना महत्वपूर्ण है। इस संकट ने स्वास्थ्य अधिकारियों और ग्रामीण समुदाय दोनों को सतर्क कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 9 लोगों की मौत सुनिश्चित रूप से हैपेटाइटिस के कारण हुई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई लोग बिना इलाज के घर पर ही मौत का शिकार हो गए। इस कारण, स्वास्थ्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से सभी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है।

गांव में टीकाकरण और जांच अभियान लगातार जारी है, और विभाग ने सुनिश्चित किया है कि हर प्रभावित व्यक्ति को समय पर वैक्सीन और उपचार मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण सतर्क रहें और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें, तो इस बीमारी के फैलाव को नियंत्रित किया जा सकता है। छायंसा गांव की यह घटना पूरे हरियाणा के लिए चेतावनी स्वरूप है कि स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और समय पर स्वास्थ्य जांच किसी भी गंभीर वायरल संक्रमण को रोकने में कितना अहम भूमिका निभा सकते हैं।

P Chauhan

मै पीके चौहान पिछले 6 साल में पत्रकारिता में कार्यरत हूं। मेरे द्वारा राजनीति, क्राइम व मंनोरजन की खबरे अपडेट की जाती है।

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