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बरोजगारी में हरियाणा नंबर वन, यहा जनिए क्या है इसके कारण

On: July 22, 2023 2:40 PM
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हरियाणा: 75 फीसदी स्थानीय युवाओ का रोजगार देने के दावे करने वाले हरियाणा की हकीकत कुछ ओर ही है। बरोजगारी को लेकर हरियाणा नंबर पर है। संसद में दीपेंद्र हुड्डा के सवाल के जवाब में मोदी सरकार ने माना कि हरियाणा में BJP-JJP राज में बेरोज़गारी 3 गुना से भी ज़्यादा बढ़ी है जो की उत्तर भारत में सर्वाधिक है।Weather Alert: हरियाणा के इन जिलो में गरज के साथ बारिश व बिजली गिरने की संभावना

 

दीपेंद्र हुड्डा ने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 4.1 फीसदी है जबकि इसके मुताबिक, हरियाणा में बेरोजगारी दर दोगुनी से भी ज्यादा है। बेरोजगारी की दर में हरियाणा ने बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और झारखंड को भी पीछे छोड़ दिया है।

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9 साल एक भी नई फैक्ट्री नहीं लगी: हुड्डा

कई बड़े प्रोजेक्ट दूसरे राज्यों में चले गये। इसके अलावा, हरियाणा में अभी भी 2 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं। कई भर्तियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। हरियाणा का युवा हताश और निराश हैंHaryana: 12 दिन बाद तेंदुए को पिंजरें में किया कैद, नारनोल के लोगों को मिली राहत

 

हुड्डा ने कहा है कि 2014 तक प्रति व्यक्ति आय और प्रति व्यक्ति निवेश के मामले में प्रदेश आगे था। यहां दूर- दूर से लोग रोजगार के लिए आते थे लेकिन, 9 साल में राज्य में कोई नई फैक्ट्री नहीं लगी और न ही राज्य में कोई बड़ा निवेश हुआ।

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जानिए इसके कुछ मुख्य कारण

#खेती ज्यादा रूचि कम:
हरियाणा के युवाओं में कौशल विकास की कमी है। हरियाणा भी एक कृषि प्रधान राज्य है लेकिन पिछले कुछ सालों में हुए सर्वे और विशेषज्ञों के मुताबिक, हरियाणा में कृषि क्षेत्र में काफी कमी रही है। इससे हरियाणा का युवा बेरोजगार है।

#बाहर के श्रमिका का कब्जा
हरियाणा की कंपनियों में बाहरी कर्मचारी काम करते हैं। बिहार के ज्यादातर मजदूर फैक्ट्रियों में काम करते हैं। जिन मशीनों का उपयोग ऑटोमोबाइल या कपड़ा कंपनियों में किया जाता है उनकी उपलब्धता हरियाणा में बहुत कम है। जिसके कारण हरियाणा के युवाओं को हरियाणा की कंपनियों में नौकरी नहीं मिल पा रही है।

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#लॉकडाउन : लॉकडाउनलगने के बाद कई कंपनियां अचानक बंद हो गईं। उन कंपनियों में काम करने वाले मजदूर ऐसे लोग थे जो रोज कमाते थे और रोज खाते थे। कई कर्मचारियों ने आधे वेतन पर काम किया और कई को नौकरी से निकाल दिया गया।

स्थानीय लोगों केा रोजगार भी नहीं दिया जा रहा है। हरियाण मे एक धारणा बनी हुई हैं अगर स्थानीय लोगो को रोजगार दिया तो वे यूनियन बनाकर स्टाक करेगें।

Harsh

मै पिछले पांच साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। इस साइट के माध्यम से अपराध, मनोरंजन, राजनीति व देश विदेश की खबरे मेरे द्वारा प्रकाशित की जाती है।

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