Dharuhera News: धारूहेड़ा। मसानी बैराज को आधिकारिक तौर पर वेटलैंड (आर्द्रभूमि) घोषित कराने के लिए 5 अप्रैल को गांव जीतपुरा के पंचायत घर से सुबह 10 बजे हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। क्योंकि मौजूदा समय में मसानी बैराज में जमा दूषित पानी आसपास के गांवों के लिए मुसीबत बना हुआ है। भूजल खराब होने से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं और लोगों में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं।PGIMS रोहतक पहुंची स्वास्थ्य मंत्री आरती राव, खामिया देकर लगाई फटकार
5 अप्रैल से चलेगा 25 गांवो में अभियान: करीब 25 गांव के लोग जुटेंगे। संस्था के संयोजक और पूर्व रेंज अधिकारी कमल सिंह यादव का कहना है कि मसानी बैराज वेटलैंड बनने की तमाम शर्तों को पूरा करता है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में हरियाणा में भिंडावास और सुल्तानपुर झील ही रामसर साइट के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। मसानी बैराज में भी वह क्षमता है कि उसी तर्ज पर विकसित किया जा सके।Dharuhera News

संस्था का मानना है कि यदि सरकार इसे वेटलैंड घोषित कर पानी को उपचारित करने की व्यवस्था करती है तो जल प्रदूषण का खतरा खत्म हो जाएगा।
जानिए क्यों पडी इसकी जरूरत: कमल सिंह ने बताया कि 5 अप्रैल से शुरू होने वाले इस हस्ताक्षर अभियान में पर्यावरण प्रेमियों, युवाओं और स्थानीय निवासियों को बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया है। साथ ही जिले के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

यह हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र प्रदेश सरकार और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को भेजा जाएगा ताकि मसानी बैराज की किस्मत बदली जा सके। मसानी बैराज दक्षिण हरियाणा की लाइफलाइन बन सकता है। अपील की है कि आसपास के गांव के लोग अभियान का हिस्सा बनें।RTI के नाम बडा खेल, मास्टर माइंड ₹1 लाख की रिश्वत के साथ चढा हत्थे
काले पानी से दुर्लभ प्रजातियां हुई नष्ट: बता दें कि साल 2012 में जब लाल बहादुर शास्त्री रिचार्ज कैनाल की ओर से यहां साफ पानी छोड़ा गया था तब यहां जैव विविधता का अद्भुत नजारा देखने को मिला था। यहां साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर फ्लेमिंगो, रफ, तिदार, गुलाबी पेलिकन, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल और रेड हेडेड फाल्कन जैसी दुर्लभ प्रजातियां देखी गई थीं। इतना ही नहीं यदि इसे वेटलैंड का दर्जा मिलता है तो न केवल इन पक्षियों की वापसी होगी बल्कि यह क्षेत्र इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र भी बनेगा।

















