Dharuhera News: मसानी बैराज को वेटलैंड आर्द्रभूमि घोषित कराने के लिए चलेगा हस्ताक्षर अभियान

On: April 5, 2026 7:32 AM
Follow Us:
मसानी बैराज को वेटलैंड आर्द्रभूमि घोषित कराने के लिए चलेगा हस्ताक्षर अभियान

Dharuhera News: धारूहेड़ा। मसानी बैराज को आधिकारिक तौर पर वेटलैंड (आर्द्रभूमि) घोषित कराने के लिए 5 अप्रैल को गांव जीतपुरा के पंचायत घर से सुबह 10 बजे हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। क्योंकि मौजूदा समय में मसानी बैराज में जमा दूषित पानी आसपास के गांवों के लिए मुसीबत बना हुआ है। भूजल खराब होने से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं और लोगों में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं।PGIMS रोहतक पहुंची स्वास्थ्य मंत्री आरती राव, खामिया देकर लगाई फटकार

 

5 अप्रैल से चलेगा 25 गांवो में अभियान: करीब 25 गांव के लोग जुटेंगे। संस्था के संयोजक और पूर्व रेंज अधिकारी कमल सिंह यादव का कहना है कि मसानी बैराज वेटलैंड बनने की तमाम शर्तों को पूरा करता है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में हरियाणा में भिंडावास और सुल्तानपुर झील ही रामसर साइट के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। मसानी बैराज में भी वह क्षमता है कि उसी तर्ज पर विकसित किया जा सके।Dharuhera News

मसानी बैराज को वेटलैंड घोषित कराने के लिए छिड़ेगी जंग, इस दिन 26 गांवों में शुरू होगा अभियान
मसानी बैराज को वेटलैंड घोषित कराने के लिए छिड़ेगी जंग, इस दिन 26 गांवों में शुरू होगा अभियान

संस्था का मानना है कि यदि सरकार इसे वेटलैंड घोषित कर पानी को उपचारित करने की व्यवस्था करती है तो जल प्रदूषण का खतरा खत्म हो जाएगा।

 

 

जानिए क्यों पडी इसकी जरूरत: कमल सिंह ने बताया कि 5 अप्रैल से शुरू होने वाले इस हस्ताक्षर अभियान में पर्यावरण प्रेमियों, युवाओं और स्थानीय निवासियों को बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया है। साथ ही जिले के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

MASANI SAHABI

यह हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र प्रदेश सरकार और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को भेजा जाएगा ताकि मसानी बैराज की किस्मत बदली जा सके। मसानी बैराज दक्षिण हरियाणा की लाइफलाइन बन सकता है। अपील की है कि आसपास के गांव के लोग अभियान का हिस्सा बनें।RTI के नाम बडा खेल, मास्टर माइंड ₹1 लाख की रिश्वत के साथ चढा हत्थे

काले पानी से दुर्लभ प्रजातियां हुई नष्ट: बता दें कि साल 2012 में जब लाल बहादुर शास्त्री रिचार्ज कैनाल की ओर से यहां साफ पानी छोड़ा गया था तब यहां जैव विविधता का अद्भुत नजारा देखने को मिला था। यहां साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर फ्लेमिंगो, रफ, तिदार, गुलाबी पेलिकन, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल और रेड हेडेड फाल्कन जैसी दुर्लभ प्रजातियां देखी गई थीं। इतना ही नहीं यदि इसे वेटलैंड का दर्जा मिलता है तो न केवल इन पक्षियों की वापसी होगी बल्कि यह क्षेत्र इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र भी बनेगा।

 

Sunil Chauhan

सुनील चौहान हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

google-newsGoogle News

Follow Now