हरियाणा के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। हिसार जिले से खाटू श्याम और सालासर धाम के लिए हेलीकॉप्टर सेवा जल्द ही शुरू होने जा रही है। यह सेवा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को और भी आसान और सुविधाजनक बनाएगी। अभी हिसार से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होगी, इसके बाद गुरुग्राम से भी इस सेवा को शुरू करने की योजना है। राजस्थान सरकार ने इस सेवा को शुरू करने के लिए अपनी सहमति पहले ही दे दी है, अब सिर्फ आधिकारिक सहमति की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है।
यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा
फिलहाल हिसार से सालासर धाम और खाटू श्याम बाबा तक की यात्रा सड़क मार्ग से की जाती है, जिसमें करीब साढ़े तीन से चार घंटे का समय लगता है। खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को चार से पांच घंटे का लंबा सफर तय करना पड़ता है। लेकिन अब हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इस सेवा के शुरू होने से श्रद्धालुओं को मात्र एक घंटे में अपने गंतव्य तक पहुंचने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका समय बचेगा। खाटू हेलीकॉप्टर सेवा
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
हेलीकॉप्टर सेवा से न केवल हरियाणा बल्कि राजस्थान के श्रद्धालुओं को भी लाभ मिलेगा। विपुल गोयल ने कहा कि इस सेवा के शुरू होने से हरियाणा और राजस्थान के बीच धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह दोनों राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए एक सरल और सुविधाजनक यात्रा विकल्प बन जाएगा। सरकार इस हेलीकॉप्टर सेवा को शुरू करने के लिए पूरी योजना बना रही है और इस संबंध में अगले महीने राजस्थान सरकार के साथ बैठक होगी, जिसमें हेलीपैड और यात्रा से जुड़ी अंतिम तैयारियों पर चर्चा की जाएगी।
राजस्थान सरकार से मिल चुकी है सहमति
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार इस हेलीकॉप्टर सेवा के लिए अपनी सहमति पहले ही दे चुकी है। अब आधिकारिक सहमति को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो जाएगी, जिससे हरियाणा और राजस्थान के बीच यात्रा और भी आसान हो जाएगी।
श्रद्धालुओं के लिए होगी सुविधाजनक
हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। लंबी दूरी की यात्रा और रास्ते में लगने वाला समय अब कम हो जाएगा और श्रद्धालु आसानी से अपने निर्धारित समय पर खाटू श्याम और सालासर धाम के दर्शन कर सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि श्रद्धालुओं का यात्रा अनुभव भी सुविधाजनक और आरामदायक होगा।

















