Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक कामकाज की भाषा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब से विभाग के सभी सरकारी कार्य, पत्राचार और फाइलों की प्रक्रिया केवल हिंदी भाषा में की जाएगी। इस निर्णय को लागू करने के पीछे मंत्री ने भाषा की सुलभता और आमजन की समझ को मुख्य कारण बताया है।
महिपाल ढांडा ने कहा कि अंग्रेज़ी भाषा के कारण आम कर्मचारियों और खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों को सरकारी प्रक्रिया समझने में कठिनाई होती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे स्वयं अंग्रेज़ी भाषा में पूरी तरह से पारंगत नहीं हैं और इस कारण विभागीय फाइलें पढ़ने में बाधा आती है। ऐसे में उन्होंने निर्णय लिया कि यदि शिक्षा विभाग के सारे काम हिंदी में होंगे, तो न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि फाइलों की गति और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी तेज होगी।Haryana News
इस नई नीति के अनुसार, अब शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी सरकारी आदेश, सूचना पत्र, इंटरनल मेमो, नोटशीट, शिक्षकों से संबंधित पत्राचार और अन्य दस्तावेज हिंदी में अनिवार्य रूप से लिखे जाएंगे। हालांकि अंग्रेज़ी का पूरी तरह से बहिष्कार नहीं किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट किया गया है कि हिंदी को ही प्राथमिक और अनिवार्य भाषा के रूप में उपयोग किया जाएगा।
राज्य भर के सरकारी शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि हिंदी में कामकाज से संवाद प्रक्रिया आसान होगी और विभागीय देरी पर भी लगाम लगेगी। खासकर गांवों में कार्यरत शिक्षक, जिनके पास अंग्रेज़ी की जानकारी सीमित है, उन्हें इससे सीधा लाभ मिलेगा।
कुछ आलोचकों का यह भी कहना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा और डिजिटल शिक्षा के दौर में अंग्रेज़ी को दरकिनार करना उचित नहीं होगा, लेकिन सरकार का पक्ष है कि हिंदी भाषा में दक्षता के साथ-साथ तकनीकी दक्षता भी समानांतर रूप से बढ़ाई जा सकती है।
इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग को 15 दिन के भीतर सभी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने हैं, ताकि नई प्रणाली बिना किसी बाधा के लागू हो सके। यह आदेश आने वाले समय में राज्य के अन्य विभागों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

















